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महंगा ईंधन बढ़ा रहा है आम आदमी की मुश्किलें

वॉशिंगटन। ईरान युद्ध के चलते दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। भारत में पेट्रोल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के विरोध में गिग वर्कर्स की हड़ताल के बीच एक नई वैश्विक रिपोर्ट ने इस बात का खुलासा किया है कि किसी देश के आम आदमी को पेट्रोल भरवाने के लिए अपनी मासिक कमाई का कितना हिस्सा खर्च करना पड़ता है। ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज द्वारा जारी गैसोलीन अफोर्डेबिलिटी रिपोर्ट में दुनिया के विभिन्न देशों की तुलना की गई है कि 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में एक औसत व्यक्ति की मासिक आय का कितना प्रतिशत खर्च होता है। इस रिपोर्ट के लिए विश्व बैंक के प्रति व्यक्ति जीडीपी डेटा का उपयोग किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पड़ोसी देशों म्यांमार, पाकिस्तान और नेपाल में स्थिति बेहद चिंताजनक है। इन देशों में कम आय और महंगे ईंधन के कारण 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में ही लोगों की एक महीने की कमाई का 47 प्रतिशत से लेकर 52 प्रतिशत तक हिस्सा खर्च हो जाता है। यानी इन देशों में आम परिवारों के लिए निजी वाहन चलाना एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बन चुका है क्योंकि उनकी आधी कमाई सिर्फ पेट्रोल की भेंट चढ़ जाती है।इस सूची में भारत की स्थिति मध्यम स्तर पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में एक औसत नागरिक की मासिक आय का लगभग 8 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक हिस्सा खर्च होता है। विकसित देशों की तुलना में भारत में पेट्रोल का यह खर्च आम लोगों के बजट पर काफी गहरा और बड़ा असर डालता है।

इसके विपरीत, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने के लिए मासिक आय का केवल 1 प्रतिशत से 2 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च करना पड़ता है। अमेरिका, लग्ज़मबर्ग और सऊदी अरब भी इसी श्रेणी में हैं, जहां उच्च आय और घरेलू तेल उत्पादन के कारण पेट्रोल बहुत किफायती साबित होता है। वहीं नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों में पेट्रोल की कीमतें अत्यधिक होने के बावजूद, वहां के नागरिकों की उच्च आय के कारण उन पर इसका असर केवल 2 प्रतिशत से 4 प्रतिशत तक ही पड़ता है।

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