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पेपर लीक का बम प्रधान पर फोड़ने की तैयारी में राहुल गांधी

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हाथ में नीट-यूजी पेपर लीक का बम आ गया है। यह ऐसा बम है, जिसमें लाखों युवा और उनके करोड़ों परिवारजन का भविष्य और नाराजी जुड़ी हैं। करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वाले इस बम को लेकर, राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने लगातार परीक्षा पेपर लीक होने के मामले को सर्वाेच्च प्राथमिकता पर रखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेने या बर्खास्त करने की सीधी मांग कर दी है। देश के विभिन्न राज्यों में पेपर लीक की 80 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं।  नीट परीक्षा के 2024 में पेपर लीक हुए थे। इस परीक्षा में बड़ी संख्या में लोग 700 से ज्यादा अंक लेकर हजारों परीक्षार्थी पास हुए थे। जिनके एडमिशन एम्स और अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में नीट परीक्षा परिणाम के बाद हुए थे। उस परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे थे। उस समय यह मामला रफा-दफा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट के बीच में आ जाने के कारण ना तो दोबारा परीक्षा हुई, ना ही परीक्षा परिणाम को लेकर सरकार ने कोई जांच कराई। नीट परीक्षा में लगातार गड़बड़ी की शिकायत आती रही है। देश में हजारों करोड़ों रुपए का यह ऐसा घोटाला है। जो एम्स और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के नाम पर पिछले कई वर्षों से चल रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस, निजी कॉलेजों की तुलना में बहुत कम होती है। प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस लाखों रुपए प्रतिवर्ष तक पहुंचती है। ऐसी स्थिति में नीट परीक्षा के माध्यम से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर कोचिंग सेंटर, दलाल इस गोरख धंधे में शामिल होकर करोड़ों रुपए की कमाई कर रहे हैं। परीक्षा से जुड़े लोगों को हर साल करोड़ों रुपयों की कमाई हो रही है। इस बार भी करीब 22 लाख छात्र-छात्राओं ने नीट के फॉर्म भरे थे। हजारों करोड़ों रुपए की फीस परीक्षार्थियों से वसूली गई।  कोचिंग सेंटर में हजारों करोड़ों रुपए छात्र-छात्राओं ने खर्च किए हैं। कई छात्र-छात्राओं ने दो से तीन साल तक रात दिन मेहनत करके इस परीक्षा की तैयारी की थी। पेपर लीक हो जाने से सबके भविष्य में प्रश्न चिन्ह लग गया है। इस मामले को लेकर लगभग सभी राज्यों के युवा अब सड़कों पर आ गए हैं। दक्षिण के राज्यों ने अलग तरह से प्रवेश परीक्षा संचालित करने की बात करना शुरू कर दी है। अभी तक 80 बार से ज्यादा विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। युवा वर्ग इस समय काफी नाराज है। सभी राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। ऐसी स्थिति में राहुल गांधी ही एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने खुलकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने या बर्खास्त करने का दबाव प्रधानमंत्री पर बनाना शुरु कर दिया है। इस्तीफे के इस बम को आसानी से डिफ्यूज कर पाना केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के बस की बात नहीं होगी। इस बार इस लड़ाई में राहुल गांधी के साथ बड़े पैमाने पर युवा भी साथ में है। रही सही कसर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगारों और फर्जी डिग्री धारकों के लिए परजीवी होने तथा जो असंवेदनशील टिप्पड़ी की है, उसके बाद से युवाओं में नाराजी बढ़ गई है। न्यायपालिका पर विश्वास भी एक तरह से कम हो गया है। जांच एजेंसी सीबीआई हमेशा छात्रों पर कार्यवाही करती है। व्यापम से लेकर अभी तक दर्जनों बार व्यापम और नीट के जो पेपर लीक हुए हैं, उसमें कार्यवाही हमेशा निर्दाेष छात्रों के ऊपर हुई है। कभी किसी भी धंधेबाज और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं की गई है। नैतिकता या जिम्मेदारी के आधार पर कुर्सी पर बैठे हुए नेताओं ने कभी इस्तीफा नहीं दिया है। जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कभी कोई कार्यवाही नहीं हुई है।  जिसके कारण युवा नाराज होकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है। इस समय मंहगाई, बेरोजगारी तथा पेपर लीक को लेकर राहुल गांधी के हाथ में एक ऐसा मौका लग गया है, जिससे वह सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। 12 साल में पहली बार मोदी सरकार के किसी मंत्री से, विपक्ष ने इस्तीफा के लिए दबाव बनाया है। यह दबाव खाली जाएगा, ऐसा दिखता नहीं है। राहुल गांधी अब विपक्ष की राजनीति करना सीख गए हैं। मौके का फायदा किस तरह से उठाया जाता है, यह जान गए हैं। वर्तमान स्थिति में छात्रों और युवाओं के गुस्से को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान को ढाल बनाकर इस्तीफा देने का दबाव बना चुकें हैं। आर्थिक संकट से घिरी सरकार पर राहुल गांधी लगातार हमले कर रहे हैं।  इसकी परिणति किस रुप में होगी कहना मुश्किल है।

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