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पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कटहल

नई दिल्ली । स्वास्थ्य के लिहाज से कटहल को पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर फल माना जाता है। आयुर्वेद में भी कटहल के सेवन को लाभदायक बताया गया है। कटहल में फाइबर, विटामिन सी और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। बिहार सरकार का पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग भी कटहल को स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद उपयोगी मानता है। विभाग के अनुसार, कटहल न केवल पौष्टिक फल है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कटहल के पेड़ बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा कटहल की खेती किसानों के लिए आय का अच्छा स्रोत बन सकती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय आजीविका को मजबूती मिलती है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते पर्यावरणीय संकट के दौर में ऐसे पेड़ों का महत्व और भी बढ़ जाता है। कटहल का वैज्ञानिक नाम आर्टाेकार्पस हेटरोफिलस है। यह एक मध्यम आकार का सदाबहार पेड़ होता है, जिसकी सबसे बड़ी पहचान इसका विशाल फल है। कटहल की बाहरी सतह छोटी-छोटी नुकीली संरचनाओं से ढकी होती है। स्वादिष्ट होने के साथ यह फल पोषण का बड़ा स्रोत माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कटहल में मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और संक्रमण से बचाने में मदद करता है। वहीं इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाकर कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होता है। 

विशेषज्ञ बताते हैं कि कटहल में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं। इसका नियमित सेवन शरीर में ऊर्जा बनाए रखने और थकान कम करने में भी लाभकारी माना जाता है। कम कैलोरी और अधिक फाइबर होने के कारण यह वजन नियंत्रण में भी मदद कर सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब अपने आहार में कटहल को शामिल करने लगे हैं। कटहल का सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि इसके बीज भी काफी पौष्टिक माने जाते हैं। बीजों को उबालकर या भूनकर खाया जाता है और इन्हें प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है।

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