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शक्तिशाली आसन है ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन- योगाचार्य

नई दिल्ली। योग की विस्तृत परंपरा में ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन एक ऐसा शक्तिशाली आसन है जो शरीर की जकड़न को दूर करने, पाचन तंत्र को सुधारने और समग्र शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में अत्यंत सहायक है। यह कहना है योगाचार्यों का। उनके अनुसार, ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन तीन संस्कृत शब्दों के मेल से बना है।  ऊर्ध्व मुख का अर्थ है ऊपर की तरफ चेहरा या ऊपर की ओर उठा हुआ। पश्चिम का अर्थ शरीर का पिछला हिस्सा होता है, जैसे रीढ़, कूल्हे और पैरों के पिछले भाग। उत्तान का अर्थ है गहरा खिंचाव, और आसन का अर्थ है मुद्रा। इस प्रकार, इस आसन का शाब्दिक अर्थ है ऊपर की ओर चेहरा करते हुए शरीर के पिछले हिस्से में गहरा खिंचाव लाने वाली मुद्रा। अंग्रेजी में इसे अपवर्ड फेसिंग इंटेंस वेस्ट स्ट्रेच भी कहा जाता है।

 इस आसन में साधक उभय पादांगुष्ठासन के समान पैरों के अंगूठों को पकड़कर शरीर का संतुलन बनाए रखता है, साथ ही धड़ को आगे की तरफ पैरों की ओर झुकाकर रीढ़ और पैरों के पिछले हिस्से में गहरा खिंचाव लाता है। यह अष्टांग योग की प्राथमिक शृंखला का एक उन्नत आसन है और उभय पादांगुष्ठासन के बाद का अगला स्तर माना जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इस आसन के महत्व पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार, ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन एक उन्नत योगासन है, जिसमें शरीर का संतुलन कूल्हों (सिट बोन्स) पर बनाए रखा जाता है। इसमें दोनों पैरों को ऊपर आकाश की ओर सीधा खींचा जाता है और हाथों से पंजों को मजबूती से पकड़ा जाता है। यह अभ्यास कोर शक्ति, रीढ़ के लचीलेपन और संतुलन को अद्भुत रूप से सुधारता है। यह एकमात्र ऐसा योग आसन है जो शरीर के पिछले हिस्से के लचीलेपन और आगे वाले हिस्से की ताकत दोनों को एक साथ बढ़ाता है।

 यह सुनिश्चित करता है कि लचीलापन केवल बैठा रहने पर ही न रहे, बल्कि व्यक्ति के दैनिक कार्यों और शारीरिक गतिविधियों के दौरान भी बना रहे। इस आसन के नियमित अभ्यास से हैमस्ट्रिंग पैसिव तरीके से लंबी और लचीली होती हैं, जिससे पैरों में खिंचाव कम होता है। इसके अतिरिक्त, यह रीढ़ को भी गहरा खिंचाव देता है, जिससे रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है और पीठ दर्द में राहत मिलती है। यह आसन पेट के अंगों को भी मसाज करता है, जिससे पाचन क्रिया सुधरती है और कब्ज जैसी समस्याओं में लाभ होता है। संतुलन बनाने की चुनौती के कारण यह कोर मांसपेशियों को मजबूत करता है, जो समग्र शारीरिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। यह तनाव कम करने, मन को शांत करने और एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक होता है। जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह आसन कूल्हों को खोलने और शरीर में ऊर्जा का संचार करने का एक बेहतरीन तरीका है। 

हालांकि, यह एक उन्नत आसन है, इसलिए इसका अभ्यास किसी अनुभवी योग गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। पीठ, घुटने या हैमस्ट्रिंग में गंभीर चोट या दर्द होने पर इस आसन को करने से बचना चाहिए या अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। अपने शरीर की सीमाओं को समझना और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाना महत्वपूर्ण है ताकि चोट से बचा जा सके और आसन के अधिकतम लाभ प्राप्त किए जा सकें। मालूम हो कि आज की आधुनिक जीवनशैली में घंटों बैठकर काम करना, कंप्यूटर और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के कारण कंधों में अकड़न, पीठ में दर्द और पैरों में खिंचाव जैसी शारीरिक समस्याएं बेहद आम हो गई हैं। ऐसे में योग केवल शरीर को मोड़ने और खींचने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर से जुड़ने और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। 


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