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सरबजोत निशानेबाजी का रुझान बढ़ा

अंबाला । हरियाणा के अंबाला शहर में आजकल युवाओं के बीच निशानेबाजी का रुझान बढ़ा है। इसका कारण यहां से निकले निशानेबाज सरबजोत सिंह को पेरिस ओलंपिक में मिली सफलता है। इससे एक समय जहां यहां के युवा पहलवान बनना चाहते थे। वहीं अब  निशानेबाज बनना चाहते हैं। इसी कारण अंबाला की विभिन्न निशानेबाजी अकादमियों में बच्चों और युवाओं की भी भीड़ बढ़ रही है। अब यहां के उभरते हुए खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं। 

वहीं अभिभावक भी अपने बच्चों में बढ़ती रुचि को देखते हुए उन्हें निशानेबाज की बारीकियां सीखने के लिए अकादमियों तक लेकर पहुंच रहे हैं। यह दिखाता है कि अब निशानेबाज को केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक करियर विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है। वहीं सरबजोत सिंह के कोच अभिषेक राणा भी अंबाला में अपनी अकादमियों के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को तराशने का काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ खिलाड़ियों को पदक जीतने के लिए तैयार करना ही नहीं, बल्कि उन्हें अनुशासन, एकाग्रता और सही दिशा देना भी है, जो किसी भी खेल और जीवन में सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। वे मानते हैं कि एक संतुलित दृष्टिकोण ही खिलाड़ियों को लंबी रेस का घोड़ा बनाता है। अभिषेक राणा के कोच रहे बलबीर सिंह का कहना है कि हर बच्चे की क्षमता और रुचि को समझना सबसे पहला कदम होता है। उनके अनुसार, किसी भी खेल में अनुशासन की अहमियत सर्वाधिक होती है और जो खिलाड़ी अपने कोच के निर्देशों का गंभीरता से पालन करते हुए लगातार अभ्यास करता है, वही आगे चलकर बेहतरीन प्रदर्शन कर पाता है। बलबीर सिंह यह भी बताते हैं कि लगभग 10 साल की उम्र के बाद बच्चे निशानेबाजी का अभ्यास कर सकते हैं। 

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