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एवियन। जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार शाम एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच पिछले 16 महीनों से चले आ रहे तनावों पर खुलकर चर्चा की गई। हालांकि इस बैठक में किसी बड़े नए समझौते की घोषणा नहीं हुई, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में भारत के प्रति मजबूत समर्थन दोहराते हुए कहा कि अगर भारत पर कोई हमला होता है तो अमेरिका मदद के लिए पहुंचेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के संबंध रूसी तेल खरीद, भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बेहतर होते संबंधों जैसे मुद्दों पर कुछ हद तक तनावग्रस्त रहे हैं।
बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा, भारत पर कोई भी हमला करेगा तो हम मदद के लिए वहां पहुंचेंगे। उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों की ओर इशारा करते हुए यह भी कहा कि ये सभी लोग भारत से प्यार करते हैं। जब एक रिपोर्टर ने पूछा कि उनके कार्यकाल में भारत में कई कदमों को नापसंद किया गया है, तो ट्रंप ने जवाब दिया, वॉशिंगटन में अभी भारत का बहुत अच्छा मित्र है। मुझे मालूम नहीं कि समस्या कहां हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तरफ इशारा करते हुए जोड़ा, जब तक यह व्यक्ति सत्ता में है, हम भारत पर कोई खतरा होने पर मदद करेंगे। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत और अमेरिका के बीच कोई औपचारिक रक्षा समझौता नहीं है जो एक देश पर हमला होने पर दूसरे को सैन्य मदद प्रदान करने के लिए बाध्य करे। ऐसे में ट्रंप के इस बयान को एक व्यक्तिगत या राजनीतिक आश्वासन माना जा सकता है, न कि किसी औपचारिक कानूनी संधि का हिस्सा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर राष्ट्रपति ट्रंप को पश्चिम एशिया युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही भारतीय नाविकों की सुरक्षा और इस युद्ध के कारण उन्हें हो रही समस्याओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से भारत सहित अन्य देशों को होने वाली समस्याओं पर भी प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मोदी ने जोर दिया कि ये नाविक अपनी सेवाओं से पूरी दुनिया की मदद कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय नाविकों से जुड़े सवालों पर ट्रंप ने कोई सीधा या स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ट्रंप ने बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने मोदी को बेहद सख्त वार्ताकार बताते हुए कहा, वह देखने में बहुत सुंदर और अच्छे लगते हैं, बिल्कुल फरिश्ते जैसे। लेकिन असल में वह बेहद कठोर हैं। वह एक किलर हैं, जितने सख्त इंसान हो सकते हैं उनमें से एक। लेकिन उनकी शक्ल इतनी भली है कि वह आपको अचानक चौंका (सरप्राइज कर) देते हैं। वह भारतीयों को बहुत प्यार करते हैं, लेकिन अमेरिका को भी करते हैं।
दोनों नेताओं की 13 फरवरी 2025 को हुई थी मुलाकात
दोनों नेताओं के बीच पिछली बैठक 13 फरवरी, 2025 को वाशिंगटन में हुई थी, जहां उन्होंने एक व्यापक वैश्विक सामरिक साझेदारी (कॉम्पैक्ट) की घोषणा की थी। हालांकि, इसके बाद के महीनों में दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर तनाव पैदा हो गया। अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर भारी टैरिफ लगाए, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा। ट्रंप और उनके प्रशासन के कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं। यही नहीं, ट्रंप ने कई बार ऑपरेशन सिंदूर को रुकवाने का दावा किया, जिसे भारत ने लगातार नकारा। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने का भी मौका दिया, और ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की लगातार तारीफ की।
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