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यूपी और बिहार की नदियों के जलस्तर पर रखी जा रही कड़ी निगरानी

नई दिल्ली। चीन बॉर्डर के सीमावर्ती इलाकों में हाल ही में अचानक आई बाढ़ ने नेपाल में बड़ी तबाही मचाई है। तिब्बत की ओर से आए जलप्रवाह के चलते त्रिशूली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और इसने नेपाल के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा में 160 लोगों की मौत हो गई है और 750 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल के त्रिशूली और भोटेकोशी नदी क्षेत्रों में भारी बारिश व बादल फटने से आई भीषण बाढ़ का असर अब उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों पर भी दिखने लगा है, जिससे भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने रेड अलर्ट जारी किया है और प्रशासन को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद नारायणी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नारायणी नदी को भारत में गंडक नदी के नाम से जाना जाता है, इसलिए नेपाल में जलस्तर बढ़ने का सबसे सीधा असर गंडक और कोसी नदी के जलप्रवाह पर पड़ रहा है। इससे बिहार के छह जिलों और उत्तर प्रदेश के चार जिलों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बिहार के छह जिलों में बाढ़ का खतरारू नेपाल में आई भीषण बाढ़ और गंडक नदी के संभावित बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए बिहार के छह जिलों में खतरा बढ़ गया है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा, सीतामढ़ी, शिवहर और दूसरे संवेदनशील जिलों में भी स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी जिला अधिकारियों को नदी के जलस्तर, तटबंधों, निचले इलाकों, पुल-पुलियों और दूसरे संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करने और स्थानीय समुदाय को समय पर अलर्ट करने के निर्देश दिए हैं। बिहार सरकार ने बाढ़ राहत कार्यों के लिए टीमें तैनात की हैं, खासकर पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर में। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल ने बिहार में पहले ही 10 टीमें भेज दी हैं।

नेपाल में आई बाढ़ से बिहार के वाल्मीकि नगर बराज से गंडक नदी में पानी का स्तर बढ़ा है। गंडक बराज में एक समय तक जलस्तर सामान्य था, लेकिन उसके बाद से पानी तेजी से बढ़ा और कुछ घंटों के भीतर डेढ़ लाख क्यूसेक पानी बराज में पहुंच गया। पश्चिम चंपारण के निचले इलाकों से 5 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

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