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युवाओं में जीवन से पलायन की खतरनाक प्रवृत्ति

युवाओं में आत्महत्या (सुसाइड) और जीवन से पलायन करने की बढ़ती प्रवृत्ति आज एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य मुद्दा बन चुकी है। आधुनिक जीवनशैली, अत्यधिक दबाव और सामाजिक बदलावों ने युवाओं को एक ऐसे चौराहे पर खड़ा कर दिया है जहाँ वे कई बार दिशाहीन और असहाय महसूस करने लगते हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों  के वैश्विक डेटा के अनुसार, पूरी दुनिया में हर साल लगभग 7,20,000 से अधिक लोग आत्महत्या से अपनी जान गंवाते हैं।

  •  दुनिया में हर 40 सेकंड में लगभग एक व्यक्ति आत्महत्या के कारण मर जाता है।
  • 15 से 29 वर्ष के युवाओं के बीच दुनिया भर में मौत का यह चौथा सबसे बड़ा कारण बन चुका है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि हर एक सफल आत्महत्या के पीछे कम से कम 20 या उससे अधिक बार आत्महत्या के प्रयास  किए जाते हैं।
  •  दुनिया भर में होने वाली कुल आत्महत्याओं का लगभग 73ः से 77ः हिस्सा निम्न और मध्यम आय वाले  देशों में होता है, जिसमें भारत भी शामिल है।
  • भारत सरकार के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 1.70 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं।
  • वर्ष 2024 में भारत में कुल 1,70,746 लोगों ने आत्महत्या की, जबकि 2023 में यह संख्या 1,71,418 थी।
  • भारत में प्रति 1,00,000 आबादी पर आत्महत्या की दर 12.2 है।
  • कुल मामलों में पुरुषों की संख्या लगभग 73.5ः है, जिसमें दिहाड़ी मजदूर  और छात्र सबसे संवेदनशील समूहों में शामिल हैं।
  •  महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में देश की कुल आत्महत्याओं के करीब एक-तिहाई मामले दर्ज होते हैं।

अब आपको अक्टूबर माह के अंतिम दिन अख़बार की सुरखी बने सुसाइड मामलों की बानगी से अवगत कराते हैं ताकि आप आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को समझें पुणे से एक खौफनाक धटना सामने आई 30 अक्टूबर को एक महिला ने अपने 6 साल के बेटे के साथ 18वीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी. यह घटना एक हाई-प्रोफाइल सोसायटी में  फुटेज में महिला अपने बेटे के साथ 18वीं मंजिल पर जाती दिखाई दे रही है पुलिस आत्महत्या के पीछे के कारणों की जांच कर रही है.मामला पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ शहर के थेरगांव वाकड इलाके में सिग्नेचर पार्क नाम की एक हाई-प्रोफाइल सोसायटी का है, यहां 33 साल की एकता भांगड ने अपने 6 साल के बेटे माधव भांगड के साथ इमारत की 18वीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली.  जानकारी के मुताबिक, एकता भांगड अपने पति मनोज भांगड और बेटे माधव के साथ पिछले कुछ सालों से इस सोसायटी में रह रही थी जानकारी मिलते ही वाकड पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और पंचनामा भरकर आगे की जांच शुरू की. मृतक महिला का परिवार मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है. वे  पिछले दो सालों से इस सोसायटी की सातवीं मंजिल पर रह रहे थे. मृतक महिला का पति मनोज भांगड यरवदा स्थित एक आईटी कंपनी में काम करता है। 

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. यहां दो सगी बहनों ने अलग-अलग जगहों पर अपने बच्चों के साथ कुएं में कूदकर जान दे दी. पहली घटना में पति की मौत के सदमे से गुजर रही 8 महीने की गर्भवती महिला ने अपने बेटे के साथ जान दी, जबकि कुछ घंटे बाद उसकी बड़ी बहन ने भी अपने तीन बच्चों के साथ कुएं में छलांग लगा दी. इन घटनाओं में दो बहनों और चार मासूम बच्चों समेत कुल 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि गर्भ में पल रहे शिशु की भी जान चली गई। 

इसी तरह राजस्थान की राजधानी जयपुर से इस वक्त एक हादसे में पूर्णिमा यूनिवर्सिटी की छठी मंजिल से एक छात्रा कूद गई है. छात्रा के कूदने से यूनिवर्सिटी में  हड़कंप मच गया है. प्रशासन ने इलाके को सील कर जांच शुरू कर दी है. इस हादसे के बाद यूनिवर्सिटी को फिलहाल बंद कर दिया है. पूर्णिमा यूनिवर्सिटी से छात्रा से कूदने का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है. इस वीडियो में छात्रा छत की छठी मंजिल पर बिल्कुल किनारे बैठी नजर आ रही है.पूर्णिमा यूनिवर्सिटी की छठी मंजिल से कूदने वाली छात्रा की पहचान यशस्वी रोहिला के रूप में हुई है. एमबीए सेकंड ईयर की स्टूडेंट है. बताया जाता है कि यशस्वी जयपुर के गुर्जर की थड़ी इलाके के प्रेम नगर की रहने वाली है. शिवदासपुरा थाना की पुलिस मौके पर जांच में जुटी है.

  • यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम पर वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर बड़े बदलावों की तत्काल आवश्यकता है।
  • भारत सरकार देश में आत्महत्या की बढ़ती वारदातों को रोकने और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए बहु-स्तरीय  प्रयास कर रही है। सरकार ने इसके लिए कानूनी बदलाव, डिजिटल तकनीक और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया है।

सरकार द्वारा कुछ खास कदम उठाए जा रहे हैं 

  • भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा देश की पहली राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति लागू की गई है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक देश में आत्महत्या मृत्यु दर में 10ः की कमी लाना है। 
  • इसके तहत अगले कुछ वर्षों में सभी शिक्षण संस्थानों में मानसिक कल्याण पाठ्यक्रम को शामिल करने और देश के सभी जिलों में मनोरोग ओपीडी  स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

दूरदराज के क्षेत्रों तक मुफ्त और गोपनीय मानसिक परामर्श पहुँचाने के लिए सरकार ने डिजिटल तकनीक का बड़े पैमाने पर विस्तार किया हैदेश भर के 1.83 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (प्राथमिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों) में बुनियादी मानसिक स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग सेवाओं को एकीकृत किया गया है।समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फैले अंधविश्वास, शर्म और रूढ़िवादिता को खत्म करने के लिए सरकार ने सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू किए हैं, ताकि लोग समय रहते मदद मांगने के लिए आगे आ सकें। इन व्यापक सरकारी रणनीतियों  में केवल स्वास्थ्य मंत्रालय ही नहीं, बल्कि शिक्षा, कृषि, महिला एवं बाल विकास और सूचना एवं प्रसारण जैसे मंत्रालयों को भी एक साथ जोड़ा गया है ताकि युवाओं, किसानों और हर संवेदनशील वर्ग को सुरक्षा घेरा दिया जा सके।



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