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10 हजार अवैध घरों को ध्वस्त करने सुबह पहुंचे बुलडोजर

नई दिल्ली। सघन आबादी वाली नेहरू कॉलोनी में बुधवार सुबह नगर निगम ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू कर दिया। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। निगम की ओर से छह जेसीबी मशीनों और एक बड़ी तोड़फोड़ मशीन को मौके पर लगाया गया है। हालांकि प्रशासन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि अभियान के दौरान कुल कितने मकानों को हटाया जाएगा।

सुबह करीब सात बजे शुरू हुई इस कार्रवाई के साथ ही पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। नेहरू कॉलोनी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही सीमित कर दी गई। मेट्रो रोड, सैनिक कॉलोनी, बिजली दफ्तर मार्ग, मुल्ला होटल क्षेत्र और तारण नंबर की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया गया। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। मार्ग बंद होने से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ कार्यालय जाने वाले लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा। नगर निगम का कहना है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार सार्वजनिक उपयोग की भूमि, सड़कों और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक है। प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है। साथ ही क्षेत्र में प्रस्तावित विकास परियोजनाओं के लिए भूमि खाली कराना भी जरूरी बताया गया है। दूसरी ओर, इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में गहरी चिंता देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेहरू कॉलोनी में वर्षों से हजारों परिवार निवास कर रहे हैं। उनके अनुसार क्षेत्र में करीब दस हजार मकान हैं और बड़ी आबादी यहां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। निवासियों का कहना है कि पिछले वर्ष नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उसके बाद कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। अब अचानक शुरू हुए अभियान ने लोगों के सामने आवास का संकट खड़ा कर दिया है। प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग उठाते हुए प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि उचित पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है तो वे सहयोग करने को तैयार हैं। लोगों का आरोप है कि आवासीय मकानों को हटाने से पहले विस्थापित होने वाले परिवारों के भविष्य और पुनर्वास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। फिलहाल क्षेत्र में कार्रवाई जारी है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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