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आम लोगों के संघर्षों को समझने की जरुरत- सीजेपी

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत अब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के निशाने पर आ गए हैं। पार्टी ने धरना प्रदर्शनों को लेकर शीर्ष अदालत द्वारा की गई टिप्पणी पर गहरी नाराजगी जताई है। सीजेपी के नेता सौरभ दास ने कहा है कि पीठ की तरफ से की गईं ये टिप्पणियां दर्शाती हैं कि उन्हें आम लोगों के संघर्षों को समझने की जरुरत है। बीते कुछ दिनों से दास लगातार अदालत के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि धरना प्रदर्शनों को हमेशा के लिए किसी स्थान पर कब्जा करके नहीं रखा जा सकता। यह टिप्पणी सर्वाेच्च न्यायालय ने कारोबारी संगठनों की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की थी, जिसके बाद सीजेपी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

सौरभ दास ने अपनी बात रखते हुए कहा, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को कौन बताएगा कि किसी को भी किसी जगह पर कब्जा करने और हमेशा के लिए सड़क पर सोने में कोई दिलचस्पी नहीं है, खासकर तब जब हम बढ़ती महंगाई के दौर में जी रहे हैं? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार की वजह से पैदा हुए हालात और अदालत की नाकामी, या कहें कि मदद और उकसावे के चलते कभी-कभी बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं? दास ने आगे कहा कि किसी को भी कठोर कार्रवाई झेलने में मजा नहीं आता, यह जानते हुए भी कि अदालतें शायद ही प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए आगे आती हैं और सरकार या पुलिस पर लगाम लगाती हैं। उन्होंने जोर दिया कि इसके बावजूद लोग ऐसा करते हैं, क्योंकि आगे बढ़ने का यही एक रास्ता बचता है, खासकर तब जब सरकार प्रदर्शनकारियों से बात करने तक नहीं बुलाती।

सीजेपी नेता ने सीजेआई सूर्यकांत और उनकी बेंच की टिप्पणियों को सच्चाई से अलग सोच करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सोच लोगों के वर्ग और जाति के संघर्षों को बिल्कुल नहीं पहचानती, हालात को समझने में नाकाम रही है और लोगों को पसंद नहीं आएगी। दास ने सलाह दी कि यदि इतने सारे लोग बड़े खतरों के बावजूद बाहर आकर प्रदर्शन करने को तैयार हैं, तो यह समझने की कोशिश करें कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, बजाय इसके कि इन सभी सवालों, बातों और मनमाने नियमों को थोपकर उन्हें चुप कराने की कोशिश की जाए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, ज्ञानू और चुनाव आयोग में हुए फ्रॉड पर इस बेंच ने सरकार से कितने सवाल पूछे? बिल्कुल भी नहीं। यही बात पूरी कहानी बयां कर देती है।गौरतलब है कि यह टिप्पणी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में व्यापारियों की तरफ से प्रदर्शनों पर उठाए गए सवालों से जुड़ी याचिका समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आई थी। कारोबारी संगठन के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत से कहा था कि त्योहारों के दौरान बिक्री न होने से कारोबार पर गहरा असर पड़ता है और इससे भारी नुकसान होता है। उन्होंने कुछ लीक से हटकर समाधान खोजने की गुजारिश की थी। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था, आप किसी जगह पर हर समय कब्जा नहीं कर सकते। अन्य प्रदर्शनकारी भी हैं। 



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