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नोटिस पर भड़के वांगचुक , स्कूल बंद कर शराब के बार खोल दें

नई दिल्ली। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख प्रशासन द्वारा हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (एचआईएएल) के डेजर्ट फ्लावर स्कूल में सभी गतिविधियां रोकने संबंधी नोटिस की कड़ी आलोचना की है। वांगचुक ने इस सरकारी आदेश को शाही फरमान बताते हुए तंज कसा कि स्कूल बंद करो और शराब के बार खोलो। प्रशासन ने यह निर्देश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के फैसले तक लागू रहने को कहा है। बुधवार को एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वांगचुक ने प्रशासन के फैसले पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने मीडिया संस्थानों से भी अपील की कि वे उपराज्यपाल प्रशासन की प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ उनकी प्रतिक्रिया को भी निष्पक्षता से जगह दें, और इस संदर्भ में उन्होंने ग्लोबल प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की स्थिति का भी जिक्र किया। 

वांगचुक ने एचआईएएल का बचाव करते हुए उसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यताओं पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत की संसदीय शिक्षा समिति ने एचआईएएल के मॉडल को पूरे देश में लागू करने की सिफारिश की थी, और लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम में इसे स्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया है। लद्दाख प्रशासन ने मंगलवार को एचआईएएल को यह नोटिस जारी किया था। यह संस्थान सोनम वांगचुक और गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा सह-स्थापित है। लेह के तहसीलदार कार्यालय ने एचआईएएल की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गीतांजलि जे. आंगमो को दिए नोटिस में आरोप लगाया है कि फ्यांग स्थित डेजर्ट फ्लावर स्कूल में बिना उचित सहमति या अनुमति के कक्षाएं और अन्य गतिविधियां शुरू की गई थीं।

नोटिस में यह भी बताया गया है कि आंगमो ने 22 सितंबर को लेह के उपायुक्त को पत्र लिखकर एचआईएएल इकोसिस्टम के तहत डेजर्ट फ्लावर स्कूल की प्रबंध समिति के प्रस्तावित सदस्यों के लिए मंजूरी मांगी थी, जो नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) या अनुमति प्राप्त करने के लिए आवश्यक था। प्रशासन ने इस मामले में हाई कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार करने को कहा है, जिससे स्कूल की गतिविधियों पर रोक लगाई गई है।


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