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बदलते युद्ध की चुनौतियों के बीच भारत की सैन्य शक्ति को नई उड़ान

युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी युद्ध का फैसला सैनिकों की संख्या, बंदूकों और तोपों की ताकत से होता था, लेकिन आज आधुनिक तकनीक ने युद्ध के पूरे परिदृश्य को बदल दिया है। अब आसमान से निगरानी, ड्रोन तकनीक, मिसाइल प्रणाली, अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और हवाई रक्षा प्रणाली किसी भी देश की सैन्य शक्ति के महत्वपूर्ण आधार बन गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-ईरान संघर्ष ने दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पारंपरिक सैन्य ताकत के साथ तकनीकी क्षमता भी उतनी ही आवश्यक है। भारत भी बदलती परिस्थितियों को समझते हुए अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसी बदलते सैन्य परिदृश्य पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसलिए भारतीय सेनाओं को केवल वर्तमान जरूरतों के अनुरूप नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। रक्षा मंत्री का यह संदेश बताता है कि भारत अपनी सुरक्षा व्यवस्था को समय के साथ अधिक सक्षम और आधुनिक बनाने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।

भारत का रक्षा बजट वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपये हो गया है। इसमें सेना के आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। रक्षा बजट में यह बढ़ोतरी केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सेना की परिचालन क्षमता, आधुनिक तकनीक, स्वदेशी उत्पादन और राष्ट्रीय सुरक्षा के पूरे ढांचे को मजबूत करना है। किसी भी देश की आर्थिक प्रगति तभी सुरक्षित रह सकती है, जब उसकी सीमाएं सुरक्षित हों और उसकी रक्षा व्यवस्था किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हो।

भारत के लिए आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन एक बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है। वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46,429 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर करीब 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा बताता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने और घरेलू उद्योगों को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आज देश की बड़ी कंपनियों के साथ छोटे और मध्यम उद्योग भी रक्षा उत्पादन में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ भारतीय तकनीकी क्षमता को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना में नई सैन्य संरचनाओं के विकास का भी उल्लेख किया। इनमें अश्नि प्लाटून, भैरव बटालियन और शक्तिबाण रेजिमेंट विशेष महत्व रखती हैं। ये नई सैन्य संरचनाएं बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप सेना की क्षमताओं को विकसित करने के प्रयासों का हिस्सा हैं। अश्नि प्लाटून के माध्यम से पैदल सेना की प्रत्येक बटालियन को अपनी ड्रोन इकाई उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य सैनिकों को निगरानी और सूचनाओं के लिए अन्य सैन्य संसाधनों पर पूरी तरह निर्भर रहने से बचाना है। आधुनिक युद्ध में समय पर सही जानकारी मिलना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। ड्रोन तकनीक इस दिशा में सेना की सहायता कर सकती है।

भैरव बटालियन को पैदल सेना और विशेष बलों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से सेना की विभिन्न परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित जवानों की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास है। इससे विशेष बलों को अधिक जटिल और रणनीतिक महत्व वाले अभियानों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। सेना की योजना ऐसी 25 बटालियन तैयार करने की है। वहीं शक्तिबाण रेजिमेंट आधुनिक तकनीक और ड्रोन आधारित सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इन तीनों संरचनाओं का उद्देश्य सेना को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अधिक सक्षम बनाना है।

आज आसमान से निगरानी और आधुनिक हवाई सुरक्षा किसी भी देश की रक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित खतरों का समय रहते पता लगाने में आधुनिक तकनीक की उपयोगिता बढ़ी है। भारत ने भी अपनी हवाई रक्षा प्रणाली, मिसाइल क्षमता और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। देश की सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात जवानों के साहस पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उनके पास उपलब्ध आधुनिक संसाधनों और तकनीकी सहयोग पर भी निर्भर करती है।

भारत के सामने पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियां हमेशा महत्वपूर्ण रही हैं। पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी गतिविधियां भारत के लिए चिंता का विषय रही हैं। वहीं चीन के साथ सीमा पर सतर्कता और रणनीतिक तैयारी आवश्यक है। ऐसे में भारत की सैन्य शक्ति का आधुनिकीकरण किसी देश को चुनौती देने के लिए नहीं, बल्कि अपनी संप्रभुता, सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी है। भारत की नीति शांति, संवाद और सहयोग की रही है, लेकिन शांति बनाए रखने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था भी अनिवार्य है। जो देश अपनी रक्षा के लिए सक्षम होता है, उसकी कूटनीतिक स्थिति भी अधिक मजबूत होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की सोच को लगातार आगे बढ़ाया गया है। स्वदेशी हथियारों, रक्षा उपकरणों, तकनीकी अनुसंधान और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने से भारत की रक्षा क्षमता में नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। सरकार का प्रयास है कि भारतीय सेनाओं की आवश्यकताओं के अनुसार देश में ही आधुनिक तकनीक विकसित हो और विदेशी निर्भरता धीरे-धीरे कम हो। यह केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है।

जैसलमेर की बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्य भी उपस्थित रहे। रक्षा मंत्री ने अधिकारियों से आधुनिकीकरण पर प्रस्तुतीकरण देने को कहा और सदस्यों के सुझावों पर यथासंभव अमल करने का आश्वासन दिया। इससे स्पष्ट है कि रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में सरकार विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श और संस्थागत सुधारों को भी महत्व दे रही है।

भारत की सैन्य शक्ति का वास्तविक उद्देश्य युद्ध करना नहीं, बल्कि युद्ध की आशंका को रोकना और देश में शांति बनाए रखना है। सीमाएं सुरक्षित रहेंगी तो विकास की गति भी निर्बाध बनी रहेगी। किसान खेतों में उत्पादन कर सकेंगे, उद्योग आगे बढ़ेंगे, व्यापार का विस्तार होगा और नागरिक सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकेंगे। आज आवश्यकता है कि सेना को आधुनिक संसाधन, स्वदेशी तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और पर्याप्त आर्थिक सहयोग मिलता रहे। बदलते समय में वही राष्ट्र अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए वर्तमान में तैयारी करता है। भारत इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। मजबूत सेना, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और आधुनिक तकनीक के समन्वय से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।


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