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बोर्ड ऑफ पीस में पाक को झटका

 वाशिंगटन। बोर्ड ऑफ पीस की पहली औपचारिक बैठक ने गाजा के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की एक नई रूपरेखा पेश की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 10 अरब डॉलर के प्रारंभिक योगदान की घोषणा की है, जो अक्टूबर में हुए ऐतिहासिक युद्धविराम के बाद गाजा के पुनर्निर्माण की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस उच्च-स्तरीय बैठक में कई मुस्लिम बहुल देशों ने न केवल आर्थिक मदद का वादा किया, बल्कि गाजा में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सैनिक भेजने की भी पेशकश की है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा सबसे अधिक है कि अंतरराष्ट्रीय शांति सेना (आईएसएफ) के लिए सैनिक भेजने वाले देशों की सूची में पाकिस्तान का नाम नदारद है, जो खुद को इस मिशन में नेतृत्वकारी भूमिका के लिए तैयार मान रहा था।

गाजा में युद्ध के बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने और नई शासन व्यवस्था को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (आईएसएफ) के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस बल को कुल 20,000 सैनिकों की आवश्यकता है, जिसमें इंडोनेशिया एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने अकेले 8,000 सैनिक भेजने का संकल्प लिया है, जिसकी सराहना करते हुए ट्रंप ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को एक सशक्त नेता बताया। इस बल का नेतृत्व अमेरिकी कमांडर मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स करेंगे, जबकि उप-कमांड की जिम्मेदारी एक इंडोनेशियाई सैन्य अधिकारी को सौंपी जाएगी। इंडोनेशिया के अलावा मोरक्को, अल्बानिया, कजाकिस्तान और कोसोवो जैसे देशों ने भी अपने पुलिस बल और सैन्य टुकड़ियां भेजने की पुष्टि की है। मोरक्को इस मिशन के लिए पुलिस अधिकारी भेजने वाला पहला अरब देश बन गया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान का इस पूरी सैन्य व्यवस्था से बाहर होना इस्लामाबाद के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे अभी आईएसएफ के जनादेश और उसके कार्यक्षेत्र की स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि वह शांति स्थापना का हिस्सा तो बन सकता है, लेकिन हमास के निशस्त्रीकरण या उनकी सैन्य संरचना को समाप्त करने के किसी भी प्रत्यक्ष अभियान में शामिल होने से हिचकिचा रहा है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजरायल ने गाजा की शांति के लिए हमास के निशस्त्रीकरण को एक अनिवार्य शर्त के रूप में रखा है। इस बीच, गाजा में हमास के बाद की कानून-व्यवस्था के लिए पोस्ट-हमास पुलिस फोर्स की भर्ती भी शुरू हो चुकी है, जिसके लिए स्थानीय युवाओं ने बड़ी संख्या में आवेदन किए हैं।

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