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छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं होने भड़की सीजेपी

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं तो उनका संगठन नए सिरे से बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों को परेशान करना बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि उनका गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। दीपके ने यह भी कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं, उन्हें अपराधियों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। हम लोग अपनी पर आ गए तो कल ही सरकार बदल देंगे।

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर पहुंचने पर पत्रकारों से बातचीत में दीपके ने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से लोगों का आक्रोश खत्म हो गया है, तो यह उसकी गलतफहमी है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों और युवाओं में अब भी व्यापक नाराजगी है और यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला तो अगला आंदोलन पहले से कहीं बड़ा होगा। एक सवाल के जवाब में दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफा देने की बात भी कही। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को सार्वजनिक जीवन में दूसरी भूमिका अपनानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि सरकार छात्रों के साथ न्याय नहीं करेगी तो युवा लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव लाने का प्रयास करेंगे।

दीपके ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर दिल्ली में लगभग एक महीने तक आंदोलन का नेतृत्व किया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त किया गया। उन्होंने कहा कि करीब 40 दिन बाद अपने घर लौटने पर उन्हें सबसे अधिक खुशी अपने माता-पिता से मिलने की है। उनके अनुसार, भारत आने के बाद से वह लगातार आंदोलन में व्यस्त रहे और लगभग 36 दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर बिताए। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी कई राज्यों में छात्रों को परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि पुलिस छात्रों के घर जाकर उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दे रही है। दीपके ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग हुआ और अब भी उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने सरकार से इस तरह की कार्रवाई रोकने की मांग की।

लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, जब तक व्यवस्था और जिम्मेदार लोगों की नीयत में बदलाव नहीं आएगा, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट-ट्रैक कोर्ट में पहली ही सुनवाई स्थगित हो गई, जिससे न्याय प्रक्रिया की गति पर भी सवाल खड़े होते हैं।

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