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पाम ऑयल का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक

नई दिल्ली। बच्चों से लेकर बड़ों तक बड़ी संख्या में लोग पैकेटबंद खाद्य पदार्थ का सेवन करते हैं। बिस्कुट, चिप्स, केक, नूडल्स और नमकीन जैसे खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक स्वादिष्ट और कुरकुरा बनाए रखने में पाम ऑयल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कम कीमत के कारण खाद्य उत्पाद बनाने वाली कई कंपनियां इसका इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, पाम ऑयल का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है, खासकर जब यह बार-बार खाए जाने वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में पहुंचता है। पाम ऑयल में संतृप्त वसा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। आहार में संतृप्त वसा की अधिकता रक्त में कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन यानी एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकती है। बढ़ा हुआ एलडीएल हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से जुड़ा माना जाता है। इसलिए पाम ऑयल से बने खाद्य पदार्थों का अत्यधिक और नियमित सेवन करने के बजाय संतुलित आहार पर ध्यान देना जरूरी है। पाम ऑयल से जुड़ी चिंता केवल हृदय स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है।

 बिस्कुट, केक, चिप्स और अन्य पैकेटबंद स्नैक्स में वसा और कैलोरी की मात्रा भी अधिक हो सकती है। इनका लगातार सेवन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी पहुंचाता है, जिससे वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। मोटापा आगे चलकर कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। अत्यधिक वसा और कैलोरी वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन लिवर के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर ज्यादा कैलोरी और अस्वास्थ्यकर वसा वाले आहार से फैटी लिवर का जोखिम बढ़ सकता है। इसी तरह, संतृप्त वसा और अत्यधिक कैलोरी वाले आहार का लंबे समय तक सेवन इंसुलिन संवेदनशीलता और रक्त शर्करा नियंत्रण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, जिससे टाइप-2 मधुमेह का जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है।

 विशेषज्ञों के अनुसार, पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनकी सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी जरूर देखनी चाहिए। केवल ‘वेजिटेबल ऑयल’ लिखे होने पर यह मान लेना सही नहीं है कि उसमें निश्चित रूप से पाम ऑयल ही मौजूद है। इसलिए लेबल पर तेल के प्रकार और संतृप्त वसा की मात्रा की जांच करना बेहतर है। स्वास्थ्य के लिए घर में बने ताजा और पौष्टिक स्नैक्स, फल, भुने मखाने और अन्य कम प्रसंस्कृत विकल्पों को प्राथमिकता दी जा सकती है। खाना पकाने के लिए भी किसी एक तेल पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित मात्रा में उपयुक्त खाद्य तेलों का इस्तेमाल करना चाहिए। 

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