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हाथी में बैठी भाजपा पर विपक्षी दलों का हमला

पिछले एक दशक से केंद्रीय चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत को लेकर तरह-तरह के आरोप लगाते रहे हैं। 2021 के बाद से चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली राजीव कुमार के समय से विवादित हो गई थी राजीव कुमार के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बने। इन्होंने चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पूरी तरह से बदल दी। मतदाताओं को जोड़ने के स्थान पर काटना शुरु कर दिया। 15 महीनो में 13 करोड़ से ज्यादा पुराने मतदाताओं को घुसपैठिया बताकर मतदाता सूची से बाहर का रास्ता दिखा दिया। वहीं 18 साल की उम्र पूरी कर चुके मतदाताओं को मतदाता सूची में नहीं जोड़ा। फार्म 6 मे परिवर्तन कर दिया गया। एसआईआर में तार्किक विसगति के नाम पर विभिन्न राज्यों में नए-नए नियम कानून बनाए गए, नया पोर्टल तैयार किया गया। उसमें जो सॉफ्टवेयर तैयार किए गए उसकी जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखी गई। राजीव कुमार के टाइम से फ्लोटिंग मतदाताओं का जो खेल महाराष्ट्र और हरियाणा में खेला गया था। वह राजीव कुमार की अती थी। ज्ञानेश कुमार ने इस लाइन को आगे बढ़ाया। सब डिविजनल मजिस्ट्रेट और बीएलओ के अधिकार केंद्रीय चुनाव आयोग ने अपने पास रख लिए। फार्म 6 और फॉर्म 7 के जरिए मतदाता सूची में तरह-तरह के फेर बदल करके नाम जोड़ने और काटने का काम किया। यह सब काम इतने गोपनीय तरीके से हुआ, विपक्ष चिल्लाता रहा, लेकिन केंद्रीय चुनाव आयोग ने नहीं सुना, इसकी हवा भी नहीं लगने दी थी। इंडियन एक्सप्रेस ने हाल ही में केंद्रीय चुनाव आयोग में जो गड़बड़ियां हो रही थी। पूरा चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के आदेश पर संचालित हो रहा था। दो चुनाव आयुक्तों को भी जानकारी नहीं दी जा रही थी। जिसके कारण मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बगावत हुई, और एक-एक करके सारे राज खुलते चले गए। अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस चक्रव्यूह में बुरी तरह से घिर गए हैं। चुनाव आयोग की सारी गड़बड़ी का लाभ, एक ही राजनीतिक दल को मिला है, जिसे भारतीय जनता पार्टी कहा जाता है? भारतीय ज्योतिष में जब कर्म फल का समय खराब आता है। उस समय शनि-राहु और केतु न्याय करने के लिए आगे आते हैं। शनि को न्याय का देवता माना जाता है। वह बिना किसी भेदभाव के न्याय करते हैं। उनके साथ ग्रह दशा में राहु केतु भी रहते हैं, जो दंड देने का काम करते हैं। सोच को बदलने के लिए अन्य ग्रह भी समय-समय पर शनि के निर्देश पर काम करते हैं। यह ज्योतिषियों की मान्यता है। अगस्त माह से चुनाव आयोग और भाजपा की ग्रह दशा बदलना शुरू हुई है। इसका असर केंद्र सरकार और भाजपा पर पड़ता हुआ स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। शनि की महादशा में भारतीय जनता पार्टी हाथी की सवारी करते हुए सत्ता के शीर्ष पर बैठी हुई थी। अब उसी भाजपा पर कांग्रेस ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। इसमें कॉकरोच पार्टी भी जुड़ गई है। उसने 2 अक्टूबर से मुंबई से आंदोलन शुरू करने की बात कही है। 30 तारीख को सारे विपक्षी दल दिल्ली में इकट्ठे हो रहे हैं। चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत करने की तैयारी विपक्ष कर रहा हैं। एकाएक ग्रह दशा ऐसी बदलेगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। कहावत है, हाथी और ऊंट में बैठे हुए व्यक्ति को भी जब समय खराब आता है, तो कुत्ता आकर काट लेता है। कुछ यही स्थिति अब भाजपा और चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देखने को मिल रही है। न्यायपालिका जो अभी तक सरकार को संरक्षण दे रही थी। अब न्याय पालिका के ऊपर भी हमले शुरू हो गए हैं। ऐसा लगता है समय ने अपना न्याय करना शुरू कर दिया है। न्यायपालिका की सोच भी बदल रही है। शनि महाराज जब न्याय की भूमिका में आते हैं, तो न्याय को किसी तरह से टाला नहीं जा सकता है। कर्म का फल देने के लिए ही वह अस्तित्व में आते हैं। पिछले 5-6 सालों से केंद्रीय चुनाव आयोग की सहायता से चुनाव को प्रभावित करने के लिए मतदाता सूची, मतदान और मतगणना को प्रभावित करने का जो काम हो रहा था। अब वह सब सामने आ चुका है। चुनाव आयोग में बैठे दो चुनाव आयुक्त की नाराजी ने इस सारे खेल को बिगाड़ दिया है। जिस तरह से विभीषण नाराजी, रावण के लिए काल बनी थी। वही स्थिति ज्योतिशियों के अनुसार वर्तमान ग्रह दशा है। 2 अक्टूबर के बाद बड़े पैमाने पर आंदोलन होने की तैयारियां चरम पर हैं। 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए थे, वह भी अपने अधिकार के लिए सड़कों पर आ सकते हैं। इसको लेकर बड़ी चिंता सर्वत्र देखने को मिल रही है। बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं, आगे क्या हो सकता है। जिस तरह से कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है। आर्थिक स्थिति केंद्र और राज्यों की गड़बडा रही है। कर्ज और मंहगाई बढ़ती जा रही है। शेयर बाजार में पिछले 2 महीने से लगातार गिरावट बनी हुई है। आज भी 1000 अंकों से ज्यादा की गिरावट शेयर बाजार में हुई है। हर तरफ से सरकार और भाजपा को चुनौती मिल रही है। तब यह कहावत याद आती है, जब मुसीबत आती है, तो चारों तरफ से आती है। जब अच्छे दिन आते हैं, तो भगवान छप्पर फाड़ कर भी धन की वर्षा करता है। भारत में जिस तरह के हालात देखने को मिल रहे हैं। उसमें हर जगह पर चिंता ही चिंता बनी हुई है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष सब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हुए नजर आ रहे हैं।


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