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ईरान ने अमेरिका को घेरा

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकराने के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी नए हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन साथ ही कूटनीति के रास्ते को भी खुला रखना चाहता है। अरागची ने कहा कि तेहरान सैन्य टकराव के लिए कमर कस रहा है, लेकिन बातचीत की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म नहीं करना चाहता है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरान गंभीर परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी तैयार है, हालांकि कूटनीति के लिए भी वह तत्पर है। अरागची के अनुसार, अब यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करना है। उन्होंने अपने देश के 60 फीसदी यूरेनियम संवर्धन का भी बचाव करते हुए इसे अपराध नहीं बताया।

ईरानी विदेश मंत्री ने कथित होर्मुज समझौते से जुड़े एक प्रस्तावित समझौते पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि एक ऐसा प्रस्ताव मेज पर था जिसे उचित माना जा सकता था। अरागची ने चेतावनी दी कि यदि इसे बिना किसी स्पष्ट कारण के खारिज किया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी अस्वीकार करने वाले पक्ष की होगी। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इस प्रस्ताव को खारिज किए जाने की जानकारी मिली है, लेकिन मध्यस्थों के जरिए अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है। यह दर्शाता है कि पर्दे के पीछे बातचीत और मध्यस्थता की प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

अरागची ने पिछली अमेरिकी मांगों का भी उल्लेख किया, जिसमें ईरान से दो दिनों के भीतर बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि महीनों से जारी संघर्ष के बावजूद कोई निर्णायक परिणाम सामने नहीं आया है और किसी नए सैन्य हमले की स्थिति में भी परिणाम अलग होने की कोई गारंटी नहीं है। उनके बयान से यह स्पष्ट है कि ईरान एक तरफ संभावित सैन्य टकराव के लिए अपनी तैयारी का संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ बातचीत और कूटनीतिक समाधान की संभावना को भी खुला रख रहा है। अब आगे की दिशा अमेरिका-ईरान के बीच आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और मध्यस्थों के प्रयासों पर निर्भर करेगी।

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