Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles

हिंदू राष्ट्र पर बाबा रामदेव के बयान से सियासी घमासान

योग गुरु बाबा रामदेव के 'हिंदू राष्ट्र' और 'साझा पूर्वज' वाले बयान ने देश के सियासी और धार्मिक गलियारों में एक नया घमासान छेड़ दिया है। उनके इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों और मुस्लिम धर्मगुरुओं की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

इस पूरे विवाद, बाबा रामदेव के बयान और उस पर हो रही सियासत की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

बाबा रामदेव का मूल बयान

दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेव ने कहा:

"हिंदू राष्ट्र के नाम पर किसी को भी डरने की आवश्यकता नहीं है। हमारे मजहब (धर्म) अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं। हम सबके पूर्वज सनातनी, हिंदू, आर्य और वैदिक थे। हिंदुस्तान में मुसलमानों और ईसाइयों के लिए कोई खतरा नहीं है। आप दाढ़ी रखें या न रखें, कोई भी पहनावा अपनाएं, बस अपने पूर्वजों जैसा चरित्र रखें।"

विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सफाई देते हुए यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि देश में साझा सांस्कृतिक विरासत और एकता का संदेश देना था। उन्होंने भारत के संविधान को सर्वोपरि बताया।

सियासी और धार्मिक पलटवार

बाबा रामदेव के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इसे आड़े हाथों लिया:

  • कांग्रेस (सलमान खुर्शीद व अन्य नेता): कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के बयानों का संदर्भ साफ होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान समाज में विभाजन और दरार पैदा करने का काम करते हैं।

  • AIMIM (वारिस पठान व अन्य): एआईएमआईएम के नेताओं ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। वारिस पठान ने कहा कि यह देश धर्मनिरपेक्ष (Secular) है और संविधान में कहीं भी 'हिंदू राष्ट्र' का जिक्र नहीं है। उन्होंने रामदेव को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें हिंदू राष्ट्र में रहना है, तो दुनिया में जहां ऐसा राष्ट्र हो वहां चले जाएं, भारत संविधान से चलेगा।

  • मुस्लिम व शिया धर्मगुरु: कई मुस्लिम स्कॉलर्स और शिया धर्मगुरुओं ने भी इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह बार-बार बहुसंख्यक राष्ट्र की बात करके अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जो कि देश के ताने-बाने के खिलाफ है।

इस सियासी घमासान के केंद्र में दो मुख्य बातें हैं:

  1. संविधान बनाम हिंदू राष्ट्र: विपक्ष का तर्क है कि भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हर धर्म को बराबर का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा की बात करना संवैधानिक भावना के विपरीत है।

  2. 'साझा डीएनए और पूर्वज' की थ्योरी: बाबा रामदेव का कहना है कि 500-1000 साल पहले जाकर देखें तो सबके पूर्वज एक ही मिलेंगे, इसलिए घृणा या नफरत का कोई आधार नहीं है। वहीं विरोधियों का मानना है कि इस तरह की दलीलें अप्रत्यक्ष रूप से धार्मिक पहचान को दबाने या एक खास एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही हैं।

Comments (0)

Leave a Comment