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ईंधन महंगा होने से डिलीवरी और राइड सेवाएं 20 फीसदी महंगी होंगी

 नई दिल्ली । सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी ने देश की राइड-हेलिंग, ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के मद्देनजर शुक्रवार को यह इजाफा किया गया। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से इन क्षेत्रों की लॉजिस्टिक और डिलीवरी लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिसका बोझ अंततः ग्राहकों पर पड़ सकता है। उद्योग अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ईंधन की यह वृद्धि यदि लंबे समय तक बनी रहती है, तो परिचालन लागत में भारी इजाफा होगा।

इससे परिवहन, डिलीवरी और ऑनलाइन सामान की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। पेट्रोल के साथ-साथ सीएनजी के दाम भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इसका सीधा असर बाइक-टैक्सी और डिलीवरी पार्टनरों पर पड़ेगा, जिनके ज्यादातर वाहन पेट्रोल से चलते हैं। किराए की बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला जा सकता है। क्विक-कॉमर्स में तैयार भोजन और किराने के सामान जैसी श्रेणियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी, क्योंकि इनमें ईंधन लागत सीधे डिलीवरी खर्च पर असर डालती है। इलेक्ट्रिक वाहन एक विकल्प हैं, पर ज्यादातर पेट्रोल बाइकों के चलते इन्हें तेजी से अपनाना मुश्किल है। तत्काल दबाव क्विक-कॉमर्स पर, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं।

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