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पेट्रोलियम कंपनियां उपभोक्ताओं की सब्सिडी बढाई

नई दिल्ली  । अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध के बाद पश्चिम एशिया के देशों से कच्चे तेल की आवाजाही में रुकावट से सारी दुनिया के देश प्रभावित हुए हैं। कच्चे तेल और गैस के दाम तेजी के साथ बढे हैं। इससे निपटने के लिए दुनिया के एक दर्जन से ज्यादा देशों ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट पर टैक्स जीरो कर दिया है या कम कर दिया है। कई देशों ने पेट्रोल डीजल और गैस  की कीमत ना बढे, इसके लिए सब्सिडी देना शुरू कर दिया है। भारत में पिछले 4 वर्षों से कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम होने के बाद भी पेट्रोलियम कंपनियां उपभोक्ताओं से ज्यादा रेट वसूल कर रही थी अब जो संकट आया है उसमें भारत की पेट्रोलियम कंपनियां रसोई गैस पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ा रही हैं इसको लेकर भारत में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।  वैश्विक पेट्रोलियम संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कई देशों ने आम जनता को राहत देने के लिए ईंधन पर लगने वाले टैक्स में कटौती या उन्हें अस्थायी रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया है। यूरोप और एशिया के कई देशों ने बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया है। 

फ्रांस ने पेट्रोल और डीजल पर सरकारी सब्सिडी बढ़ाकर उपभोक्ताओं को राहत दी है।  जर्मनी ने ईंधन कर में अस्थायी कमी करके कीमतों को नियंत्रित किया है।  इटली और स्पेन ने  पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स घटाकर परिवहन लागत को कम करने की कोशिश की है। एशिया में साउथ कोरिया ने ईंधन कर में बड़ी कटौती की है। वहीं भारत में केंद्र और कुछ राज्य सरकारों ने वैट तथा एक्साइज ड्यूटी में कमी कर कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास किया है। भारत में केंद्र एवं राज्य सरकारी बड़ी मात्रा में टैक्स वसूल करती हैं जैसे-जैसे पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ती है उसके अनुसार सरकार का टैक्स भी बढ़ता चला जाता है। पिछले 4 सालों में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी गिरावट थी उस समय भी केंद्र सरकार राज्य सरकारों और पेट्रोलियम कंपनियों ने बढे हुए दामों पर भारी कमाई की है।

 अब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं तो भारत की पेट्रोलियम कंपनियां और भारत सरकार राहत देने की स्थान पर रसोई गैस डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ा रही है इसका असर भारत में हर चीजों पर पडना तय है जिससे महंगाई बड़ी तेजी के साथ बढ़ेगी। खाने पीने के समान दूध एवं पैकिंग मैटेरियल के रेट बढ़ जाने के कारण भारत में तेजी के साथ समान महंगे हो रहे हैं जिसके कारण लोगों में अब गुस्सा देखने को मिल रहा है।

 पेट्रोलियम कंपनियां प्रीमियम पेट्रोल के नाम पर उपभोक्ताओं से ज्यादा पैसा वसूल कर रहे हैं वहीं पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ा दी गई है डीजल के रेट बढ़ने से कृषि कार्य एवं परिवहन में सभी कीमतों के दाम बढ़ना शुरू हो गए हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है, भारत सरकार की आर्थिक स्थिति इस समय राजकोषीय घाटा बढ़ने और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी होने के कारण सरकार दबाव में है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं के ऊपर भार पड रहा है। पेट्रोलियम कंपनियों ने पिछले 4 वर्षों में जमकर कमाई की है। इसके बाद भी केंद्र सरकार पेट्रोल डीजल और गैस को सब्सिडाइज करने के स्थान पर पेट्रोलियम कंपनियों को दाम बढ़ाने की अनुमति दे रही है।इसकी आम जनों के बीच में तीव्र प्रतिक्रिया हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है, टैक्स में कटौती से उपभोक्ताओं को  राहत मिलेगी।

 विश्व के कई देशों ने पेट्रोलियम संकट से निपटने के लिए कई वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने के प्रयास पड़े पैमाने पर शुरू कर दिए हैं।

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