Shopping cart
Your cart empty!
Terms of use dolor sit amet consectetur, adipisicing elit. Recusandae provident ullam aperiam quo ad non corrupti sit vel quam repellat ipsa quod sed, repellendus adipisci, ducimus ea modi odio assumenda.
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Sequi, cum esse possimus officiis amet ea voluptatibus libero! Dolorum assumenda esse, deserunt ipsum ad iusto! Praesentium error nobis tenetur at, quis nostrum facere excepturi architecto totam.
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Inventore, soluta alias eaque modi ipsum sint iusto fugiat vero velit rerum.
Sequi, cum esse possimus officiis amet ea voluptatibus libero! Dolorum assumenda esse, deserunt ipsum ad iusto! Praesentium error nobis tenetur at, quis nostrum facere excepturi architecto totam.
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Inventore, soluta alias eaque modi ipsum sint iusto fugiat vero velit rerum.
Dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Sequi, cum esse possimus officiis amet ea voluptatibus libero! Dolorum assumenda esse, deserunt ipsum ad iusto! Praesentium error nobis tenetur at, quis nostrum facere excepturi architecto totam.
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Inventore, soluta alias eaque modi ipsum sint iusto fugiat vero velit rerum.
Sit amet consectetur adipisicing elit. Sequi, cum esse possimus officiis amet ea voluptatibus libero! Dolorum assumenda esse, deserunt ipsum ad iusto! Praesentium error nobis tenetur at, quis nostrum facere excepturi architecto totam.
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Inventore, soluta alias eaque modi ipsum sint iusto fugiat vero velit rerum.
Do you agree to our terms? Sign up
हर वर्ष 16 मई को अंतरराष्ट्रीय प्रकाश दिवस मनाया जाता है। पाठकों को बताता चलूं कि यह दिवस विज्ञान, शिक्षा, संस्कृति, ऊर्जा, चिकित्सा, संचार जैसे क्षेत्रों में और देश व समाज के सतत विकास(सस्टेनेबल डेवलपमेंट) के क्रम में प्रकाश के महत्व को समझाने और प्रकाश के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल मनाया जाता है। वास्तव में प्रकाश से तात्पर्य केवल और केवल भौतिक रोशनी से नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, जागरूकता, आशा, नवाचार और मानव प्रगति का प्रतीक भी है। धर्म, भाषा और सीमाओं से परे प्रकाश सार्वभौमिक(यूनिवर्सल) है तथा कला से लेकर दर्शन तक इसे सदैव ज्ञान और सकारात्मकता के प्रतीक के रूप में देखा गया है। सच तो यह है कि आधुनिक जीवन की रीढ़ ही प्रकाश है और बिना प्रकाश विज्ञान के आज डिजिटल इंडिया, वैश्विक कनेक्टिविटी तथा आधुनिक तकनीक की कल्पना भी संभव नहीं है। वास्तव में, अंतरराष्ट्रीय प्रकाश दिवस केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि यानी लेज़र के सफल संचालन का ही उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानवता के अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने की यात्रा का भी प्रतीक है। कहना ग़लत नहीं होगा कि यह दिवस विज्ञान और मानवता के बीच एक सेतु का कार्य करता है तथा हमें ज्ञान, विज्ञान और सकारात्मक सोच का प्रकाश फैलाने की प्रेरणा देता है।
पाठक जानते होंगे कि भारतीय संस्कृति में भी प्रकाश को अत्यंत पवित्र और ज्ञानदायी माना गया है। उपनिषदों का प्रसिद्ध मंत्र तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् हे प्रभु! हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो के बारे में आखिर कौन है जो नहीं जानते ? प्रकाश केवल बाहरी अंधकार से उजाले की ही बात नहीं करता है, बल्कि यह मनुष्य के अज्ञान, भय, भ्रम और नकारात्मकता से ज्ञान, सत्य और सकारात्मकता की ओर लगातार बढ़ने का संदेश देता है और आज के समय में तो यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। हमारे यहां दिवाली प्रकाश का सबसे बड़ा त्योहार है, जबकि लोक संस्कृति में लालटेन उत्सव भी उजाले, आशा और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक माना जाता है। इतना ही नहीं, सामाजिक जीवन में शिक्षा, जागरूकता और नैतिक मूल्यों का प्रकाश समाज को आगे बढ़ाने का कार्य करता है।
बहरहाल, यदि हम यहां पर इस दिवस के मुख्य उद्देश्यों की बात करें तो, अंतरराष्ट्रीय प्रकाश दिवस का मुख्य उद्देश्य प्रकाश विज्ञान और ऑप्टिकल तकनीकों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना, विज्ञान और तकनीक को समाज के विकास से जोड़ना, ऊर्जा, स्वास्थ्य, इंटरनेट और संचार में प्रकाश आधारित तकनीकों के योगदान को रेखांकित करना, युवाओं को विज्ञान एवं अनुसंधान के प्रति प्रेरित करना तथा देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग और शांति को बढ़ावा देना है। यूनेस्को के अनुसार यह दिवस विज्ञान, संस्कृति, कला, शिक्षा और सतत विकास में प्रकाश की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। वास्तव में यह दिवस इस बात की याद दिलाता है कि विज्ञान और तकनीक का सही उपयोग मानव कल्याण, शांति और सतत विकास के लिए कितना आवश्यक है। हाल फिलहाल, यहां पाठकों को बताता चलूं कि पहली बार यह दिवस 16 मई 2018 को मनाया गया था। 16 मई 1960 को अमेरिकी वैज्ञानिक थियोडोर मैमन ने पहली बार सफलतापूर्वक लेज़र का संचालन किया था और इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में इस दिन को अंतरराष्ट्रीय प्रकाश दिवस के रूप में चुना गया। सरल शब्दों में कहें तो यह दिन भौतिक विज्ञानी और इंजीनियर थियोडोर मैमन द्वारा लेज़र के पहले सफल संचालन की वर्षगांठ का प्रतीक है। गौरतलब है कि लेज़र का आविष्कार चिकित्सा, संचार और तकनीक के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी मोड़ साबित हुआ तथा वर्ष 2015 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय प्रकाश एवं प्रकाश-आधारित प्रौद्योगिकी वर्ष घोषित किया गया था तथा इसके बाद वर्ष 2017 में यूनेस्को ने आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय प्रकाश दिवस घोषित किया। अन्य दिवसों की भांति हर वर्ष इस दिवस की भी एक विशेष थीम/विषय-वस्तु रखी जाती है।इस साल यानी कि वर्ष 2026 की थीम प्रकाश, विज्ञान और समाज रू नवाचार और प्रभाव को आगे बढ़ाना रखी गई है। यह थीम समाज में विज्ञान और प्रकाश आधारित तकनीकों के सकारात्मक प्रभाव को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। वहीं वर्ष 2025 की थीम सतत भविष्य के लिए प्रकाश रखी गई थी, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि प्रकाश आधारित तकनीकें सौर ऊर्जा और ऊर्जा-कुशल लाइटिंग के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन से निपटने में कैसे मदद कर सकती हैं। बहरहाल, यदि हम यहां पर प्रकाश की बात करें तो वास्तव में प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है, जो हमें वस्तुओं को देखने में सक्षम बनाती है। यह विद्युतचुंबकीय तरंगों(इलैक्ट्रोमैग्नेटिक वेब्स) के रूप में यात्रा करता है तथा सूर्य इसका(प्रकाश) सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। सरल शब्दों में कहें तो जब किसी वस्तु से निकलने वाली रोशनी हमारी आंखों तक पहुंचती है, तब हम उस वस्तु को देख पाते हैं। प्रकाश की प्रमुख विशेषताओं में यह शामिल है कि प्रकाश सीधी रेखा में चलता है, तथा इसकी गति लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। इतना ही नहीं, यह निर्वात यानी वैक्यूम में भी यात्रा कर सकता है। परावर्तन और अपवर्तन इसके(प्रकाश के) महत्वपूर्ण गुण हैं तथा इन्हीं के कारण हमें रंग दिखाई देते हैं। प्रकाश के प्राकृतिक स्रोतों में सूर्य, तारे, जुगनू और बिजली की चमक शामिल हैं, जबकि बल्ब, मोमबत्ती, ट्यूबलाइट, टॉर्च और एलईडी इसके कृत्रिम स्रोत हैं। प्रकाश न केवल देखने के लिए आवश्यक है, बल्कि पौधों में प्रकाश संश्लेषण के लिए भी अत्यंत जरूरी है। यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंचने में लगभग 8 मिनट 20 सेकंड लेता है तथा इंद्रधनुष प्रकाश के सात रंगों से बनता है। लेज़र भी प्रकाश का एक विशेष रूप है।
आज के समय में प्रकाश आधुनिक जीवन की आधारशिला बन चुका है। सच तो यह है कि बिना प्रकाश विज्ञान के आज का हाई-स्पीड इंटरनेट संभव नहीं हो सकता है। दरअसल, फाइबर ऑप्टिक केबलों में प्रकाश संकेतों के जरिए इंटरनेट चलता है और यही आधुनिक वैश्विक संचार प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत है।सरल शब्दों में कहें तो इंटरनेट भी एक प्रकार से प्रकाश की देन है। आज के समय में चिकित्सा क्षेत्र में लेज़र सर्जरी, आंखों के ऑपरेशन, कैंसर के इलाज और एक्स-रे जैसी तकनीकों में प्रकाश आधारित विज्ञान का उपयोग जीवनरक्षक उपकरण के रूप में हो रहा है। यहां तक कि अंतरिक्ष अनुसंधान, उपग्रह संचार और वैज्ञानिक खोजों में भी प्रकाश की महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि क्षेत्र में विशेष एलईडी प्रकाश आधुनिक खेती और ग्रीनहाउस तकनीकों में पौधों की वृद्धि के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है। इतना ही नहीं, ऊर्जा क्षेत्र में भी प्रकाश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कहना ग़लत नहीं होगा कि सौर ऊर्जा आज स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य की सबसे बड़ी आशा बन चुकी है। एलईडी जैसी ऊर्जा-कुशल तकनीकें बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं। वास्तव में, आज प्रकाश आधारित तकनीकें संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ये तकनीकें गरीबी दूर करने, शिक्षा सुधारने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में भी खास मदद कर रही हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रकाश आधारित तकनीकें जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी सहायक मानी जाती हैं। इस प्रकार यह दिवस सतत विकास का प्रमुख आधार भी माना जाता है। प्रकाश ने कला, फोटोग्राफी, चित्रकला, सिनेमेटोग्राफी और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों को भी गहराई से प्रभावित किया है। फोटोग्राफी शब्द का शाब्दिक अर्थ ही प्रकाश से लिखना है। मंच सज्जा, दृश्य प्रभावों और आधुनिक वास्तुकला में प्रकाश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हालांकि, आधुनिक समय में प्रकाश प्रदूषण भी एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। शहरों में अत्यधिक कृत्रिम रोशनी के कारण रात का प्राकृतिक आकाश और तारे कम दिखाई देने लगे हैं। इसका नकारात्मक प्रभाव प्रवासी पक्षियों, वन्यजीवों और मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ऐसे में यह दिवस हमें सही रोशनी के सही उपयोग का संदेश भी देता है। कुल मिलाकर, अंत में यही कहा जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रकाश दिवस केवल विज्ञान का ही उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता में ज्ञान, नवाचार और प्रगति का प्रतीक है। वास्तव में आज हम प्रकाश के युग में जी रहे हैं और प्रकाश केवल रोशनी नहीं, बल्कि आधुनिक सभ्यता, शिक्षा, विज्ञान, संचार और मानवता की आधारशिला बन चुका है। यह दिवस हमें प्रेरणा देता है कि हम अपने जीवन में ज्ञान, विज्ञान और मानवता का उजाला फैलाएं तथा तमसो मा ज्योतिर्गमय के आदर्श को अपनाकर अंधकार से उजाले की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहें।
Leave a Comment