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रात में बार-बार प्यास लगने की वजह है तनाव

नई दिल्ली । गर्मियों में रात के समय बार-बार प्यास लगना और मुंह सूखना शरीर में गहरे आंतरिक असंतुलन की ओर इशारा करता है। यह स्थिति न केवल नींद में खलल डालती है, बल्कि दिन भर की ऊर्जा और एकाग्रता को भी प्रभावित करती है। इस समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें अत्यधिक तनाव, देर रात गरिष्ठ और तला-भुना भोजन करना, और शरीर में पानी की अत्यधिक कमी शामिल है। तेज मसालेदार या नमकीन भोजन भी रात में अधिक प्यास लगने का एक प्रमुख कारण बन सकता है। इसके अलावा, कुछ स्वास्थ्य स्थितियां जैसे मधुमेह, स्लीप एपनिया या कुछ दवाओं का सेवन भी मुंह सूखने और प्यास लगने की समस्या को बढ़ा सकता है। ऐसे में सिर्फ पानी पीना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि समस्या की जड़ तक जाना महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद इस समस्या को शरीर में वात और पित्त दोष के असंतुलन से जोड़कर देखता है। वात दोष की वृद्धि शरीर में रूखेपन और शीतलता बढ़ाती है, जबकि पित्त दोष का असंतुलन शरीर की आंतरिक अग्नि और गर्मी को बढ़ाता है। 

इन दोनों दोषों के बिगड़ने से पाचन क्रिया प्रभावित होती है और शरीर में जलन व बेचौनी महसूस हो सकती है, जिससे रात में बार-बार प्यास लगती है और मुंह सूखता है। आयुर्वेद के अनुसार, वात को शांत करने के लिए शरीर को आंतरिक गर्माहट, स्निग्धता और पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है, जबकि पित्त को नियंत्रित करने के लिए शीतलता प्रदान करने वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए। आयुर्वेदिक उपचारों में, मुलेठी का सेवन एक प्रभावी उपाय माना जाता है। मुलेठी के एक छोटे टुकड़े को रात में चूसने से मुंह में लगातार नमी बनी रहती है और लार का उत्पादन बढ़ता है, जिससे गले और मुंह का रूखापन कम होता है। मुलेठी पाचन तंत्र को भी दुरुस्त करने में मदद करती है। इसके अलावा, नारियल पानी का सेवन भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।

 नारियल पानी शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान करता है, इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है, और पित्त को संतुलित करने में सहायक है, जिससे शरीर में हाइड्रेशन बना रहता है और बार-बार प्यास लगने की समस्या कम होती है। त्रिफला से कुल्ला करना भी मुंह के रूखेपन को दूर करने का एक प्राचीन और प्रभावी तरीका है। त्रिफला के पानी से कुल्ला करने से मुंह के अंदर की नमी बनी रहती है और यह मौखिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है। घी का सीमित मात्रा में सेवन भी शरीर की आंतरिक नमी को बनाए रखने और पाचन क्रिया को सुचारू बनाने में सहायक हो सकता है। यह वात को शांत करता है और शरीर में स्निग्धता बढ़ाता है।

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