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कबूतरों की बीट से हो सकती है फेफडों में सूजन की बीमारी

नई दिल्ली । आमतौर पर घरों की बालकनी, छत या खिड़कियों पर जमा रहने वाली कबूतरों की बीट और पंखों से निकलने वाले कण बच्चों के फेफडों के लिए समस्या बन सकते है। इसीलिए बच्चों को धूल, फफूंदी और अन्य जैविक कणों के संपर्क से बचाना जरूरी है।  विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के अलावा कुछ संवेदनशील व्यक्तियों में भी ऐसे कणों के संपर्क से हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस नामक बीमारी हो सकती है, जिसमें फेफड़ों में सूजन आ जाती है। हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस फेफड़ों की एक सूजन संबंधी बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वातावरण में मौजूद कुछ पदार्थों के प्रति असामान्य प्रतिक्रिया करती है। पक्षियों से जुड़े प्रोटीन, फफूंदी और अन्य जैविक कण इसके संभावित कारण हो सकते हैं। बार-बार ऐसे कणों के संपर्क में आने से संवेदनशील व्यक्ति के फेफड़ों में सूजन विकसित हो सकती है। लंबे समय तक बीमारी बनी रहने और उचित उपचार नहीं मिलने पर कुछ मामलों में फेफड़ों को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है। 

हालांकि, कबूतरों के आसपास रहने वाले हर बच्चे को यह बीमारी हो, ऐसा नहीं है। बच्चों में इस बीमारी के लक्षणों में लगातार सूखी खांसी, सांस फूलना, बुखार, ठंड लगना, सीने में जकड़न और असामान्य थकान शामिल हो सकते हैं। कुछ बच्चों को खेलने या दौड़ने के दौरान सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। हालांकि, ये लक्षण अस्थमा, एलर्जी और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना संभव नहीं है। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है। कबूतरों की बीट को सूखने के बाद झाड़ू से हटाने पर उसके छोटे कण हवा में फैल सकते हैं। इन्हें सांस के जरिए अंदर लेने से कुछ लोगों में एलर्जी या श्वसन संबंधी परेशानी हो सकती है। जमा हुई बीट में फफूंदी और अन्य सूक्ष्मजीव भी पनप सकते हैं। 

इसके अलावा, घर में सीलन, गंदे एयर कूलर और खराब रखरखाव वाले वेंटिलेशन सिस्टम से भी फफूंदी के संपर्क का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए बालकनी और छत की नियमित सफाई करें तथा कबूतरों की बीट जमा न होने दें। सूखी बीट को जोर से झाड़ने या ऐसी सफाई करने से बचें, जिससे धूल हवा में फैल जाए। अधिक मात्रा में बीट जमा होने पर प्रशिक्षित सफाईकर्मी की मदद लें। सफाई के दौरान बच्चों को उस जगह से दूर रखें। बालकनी में सुरक्षित बर्ड-नेट लगवाना और एयर कूलर तथा वेंटिलेशन सिस्टम की नियमित सफाई करना भी उपयोगी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चे को लगातार खांसी, सांस फूलने या असामान्य थकान की समस्या हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और उन्हें कबूतरों की बीट या फफूंदी के संभावित संपर्क के बारे में बताना चाहिए। 


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