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नीट परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद तथा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा युवाओं को कॉकरोच कह देने के बाद रातों-रात कॉकरोच जनता पार्टी बन गई। करोड़ों लोग उसके सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जुड़ गए। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी पेपर लीक मामले और पर्यावरण को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच पार्टी के अभिजीत दिपके के साथ अनशन पर बैठ गए। अनशन स्थल पर कॉकरोच पार्टी ने छात्र संघ के नेताओं को अपने मंच पर नहीं बैठने दिया। उन्हें अलग मंच दिया गया। जिस तरह की आक्रामकता के साथ आंदोलन सरकार और व्यवस्था के खिलाफ होता है, वैसा माहौल जंतर-मंतर में देखने को नहीं मिला। ऐसा लगा, यह एक सरकारी प्रायोजित आंदोलन है। जब युवाओं की भीड़ नहीं जुटी। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आमरण अनशन की घोषणा करनी पड़ी। आंदोलन में भीड़ नहीं जुट रही थी, भीड़ जुटाने के लिए अन्ना आंदोलन जैसी पुनरावृत्ति की कोशिश की गई। ऐसा लगा कि वांगचुक के अनशन के बाद युवाओं की भारी भीड़ जंतर-मंतर पर एकजुट होगी। जिस तरह से यह आंदोलन शुरू हुआ, प्रारंभ से ही इसकी विश्वसनीयता को लेकर छात्रों और युवाओं को वह विश्वास नहीं हुआ, जो उन्हें होना चाहिए था। सरकार और पुलिस ने जिस तरह से आंदोलनकारी नेता के साथ सहानुभूति बरती। आंदोलन के नाम पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफा और परीक्षाओं में सुधार को लेकर जो आंदोलन शुरू होना था। उसके स्थान पर आंदोलनकारी सरकार के खिलाफ आंदोलन जंतर-मंतर खड़ा करने के स्थान पर विपक्षी दलों पर निशाना साधने लगे। राहुल गांधी अनशन स्थल पर क्यों नहीं आए, विपक्ष के नेता क्यों नहीं आ रहे हैं? विपक्ष के खिलाफ एक मुहिम चलाई गई, जिसने आंदोलन की कलई खोल दी है। कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक दीपके पूर्व में आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। सोनम वांगचुक ने धारा 370 और नई शिक्षा नीति को लेकर सरकार की सराहना की थी। वांगचुक की धर्मेंद्र प्रधान के साथ फोटो भी है। जिसके कारण यह आंदोलन खड़ा होने के पहले ही एक तरह से बिखरने लगा। जंतर-मंतर में जिस तरह से इस आंदोलन को गति मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल पाई। आंदोलनकारी दिल्ली पुलिस के पैरों में गिरकर गिड़िगडा रहे थे। राहुल गांधी और विपक्ष को जिस तरह से मीडिया द्वारा निशाने पर लिया गया। उससे सारे देश में एक संदेश गया। राहुल गांधी के नेतृत्व में एनएसयूआई कार्यकर्ता थे, पुलिस उन पर सख्ती कर रही थी। जो परीक्षा के पेपर लीक होने और शिक्षा व्यवस्था की कमियों को लेकर आंदोलन और प्रदर्शन कर रहे थे। जिस तरह से देश में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी सरकार के लिए एक चुनौती बने हुए हैं। राहुल गांधी को निशाने पर रखकर सोनम वांगचुक को, अन्ना आंदोलन की तर्ज पर स्थापित करने की कोशिश की गई, वह कोशिश कामयाब होती हुई नहीं दिख रही है। भ्रष्टाचार आंदोलन को लेकर अन्ना आंदोलन से ठगे गए देश के करोड़ों लोग इस आंदोलन पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। युवाओं के बीच में यह संदेश गया, आंदोलनकारी सरकार से लड़ने की बजाय सरकार से निवेदन कर रहे हैं।
18 दिन हो चुके, अभी तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफा की बात को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही है। शिक्षा नीति और पेपर लीक मामले में आंदोलनकारी और सरकार चुप्पी साधे हुए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी अपना मंच छात्र नेताओं के साथ साझा नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में आंदोलन खड़ा होने के पहले ही बिखरता हुआ नजर आया है। सोनम वांगचुक के अनशन को खत्म कराने के लिए सारे विपक्षी दल उनसे निवेदन कर रहे हैं। वह अपना अनशन त्याग दें। राहुल गांधी और विपक्षी दलों के नेताओं ने भी मांगों को समर्थन देते हुए संसद में लड़ाई लड़ने की बात कही है। कांग्रेस पार्टी और उनके कार्यकर्ता पेपर लीक मामले में जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आंदोलन थमा नहीं है। राहुल गांधी स्वयं छात्रों के पास जाकर उनकी बातों को सुन रहे हैं। छात्रों के साथ कोटा और देहरादून में जो संवाद होगा, उसके आधार पर वह संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस सक्रिय रहेंगी। पत्रकारों, संपादकों और शिक्षाविदों के बीच वर्तमान आंदोलन पर एक राय जरूर बनती हुई दिख रही है। जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामले में अन्ना आंदोलन खड़ा किया गया था। अन्ना आंदोलन से मनमोहन सरकार विदा हो केन्द्र में मोदी और दिल्ली में केजरीवाल की सरकार बन गई थी। पिछले कुछ वर्षों से राहुल गांधी एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो वर्तमान मोदी सरकार के विरोध में खड़े हुए हैं। कॉकरोच पार्टी का यह आंदोलन, विपक्ष को समाप्त करने के लिए एक षड्यंत्र के तहत खड़ा किया जा रहा है? आंदोलन से जुड़े हुए जो लोग हैं, उनकी प्रतिबद्धता को देखते हुए विपक्षी दल इस मंच से दूरी बनाए हुए हैं। कहते हैं, दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है। कुछ यही स्थिति इस आंदोलन की होती हुई दिख रही है। कॉकरोच जनता पार्टी और सोनम वांगचुक को जो लड़ाई सरकार के खिलाफ लड़नी थी, वह सरकार से ना लड़कर विपक्ष के साथ लड़ रहे हैं। जिसके कारण यह आंदोलन भटक गया है। जेन-जी के युवा इस आंदोलन की ओर आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं। सोनम वांगचुक को आगे रखकर जेन-जी को भटकाने-अटकाने के लिए इस आंदोलन की जो पटकथा लिखी गई थी, वह अब सफल होती हुई नहीं दिख रही है।
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