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नोटों की गिनती में शामिल हुआ पैसे बटोरे, फिर बना सरगना

अयोध्या। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें शामिल आरोपियों की चौंकाने वाली करतूतें सामने आ रही हैं। पता चला है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का भतीजा मनीष यादव, गणना टीम में भर्ती होते ही चढ़ावा चोरी गिरोह का सरगना बन गया था। एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, मनीष की भर्ती उसके ताऊ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी, जिन्होंने एसबीआई के रत्नेश चतुर्वेदी के माध्यम से सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के जरिए संविदा प्रक्रिया पूरी कराई थी। मनीष की भर्ती 15 अप्रैल 2026 को हुई थी, और मात्र 26 दिनों बाद, 11 मई 2026 की सीसीटीवी फुटेज में उसे चढ़ावे की गड्डियां चुराते हुए कैद किया गया।

इस बीच, पुलिस ने टिन्नू और मनीष यादव की सात दिन की पुलिस हिरासत रिमांड (पीसीआर) की मांग की है ताकि उनसे पूछताछ कर मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और बरामदगी को अंजाम दिया जा सके। अदालत आज इस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करेगी। मामले में एक नया सवाल भी उठ खड़ा हुआ है। पुलिस ने पहले 79 लाख रुपये की बरामदगी दर्ज की थी, लेकिन बाद में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी होने की आशंका जताई। इस बड़े अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह अनुमान किसी ठोस साक्ष्य पर आधारित था, या फिर ट्रस्ट ने निजी तौर पर बड़ी रकम बरामद की और पुलिस को कम राशि बताई। इन सभी पहलुओं पर गहन जांच चल रही है, जिससे इस बड़े घोटाले की और परतें खुलने की उम्मीद है।

नोटो की गड्डियां चुराने बनाते थे घेरा

सीसीटीवी फुटेज की जांच में सीधे तौर पर तीन लोग - अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा - नोटों की गड्डियां चुराते देखे गए। बाकी तीन अन्य, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय, घेरा बनाकर सीसीटीवी फुटेज के आगे खड़े होकर उनकी मदद करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि सबसे ज्यादा संपत्ति और रुपये अविनाश शुक्ला के पास से बरामद हुए थे, जिसमें मनीष उसके सहयोगी के रूप में काम कर रहा था। पुलिस अधिकारी का कहना है कि किसी भी संस्था में नए कामगार को सिस्टम समझने में समय लगता है, लेकिन मनीष की भर्ती के तुरंत बाद चोरी में लिप्त होना इस ओर इशारा करता है कि उसकी भर्ती ही चढ़ावा चोरी के लिए कराई गई थी। टिन्नू के परिवार का सदस्य होने के नाते मनीष की गणना कक्ष में धाक जम गई और पहले से चोरी कर रहे गणनाकर्मियों ने उसे अपने गिरोह में शामिल कर लिया, जिसके बाद उसने जल्द ही चोरी की कमान खुद संभाल ली।

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