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क्या मोबाइल ऐप से बीच सड़क में बंद हो सकता है ई-रिक्शा?

नई दिल्ली। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए हैं। जिनमें दावा किया जा रहा है कि सिर्फ एक मोबाइल ऐप की मदद से चलते हुए ई-रिक्शा को बीच सड़क पर रोका जा सकता है। इन वीडियो के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इलेक्ट्रिक स्कूटर और इलेक्ट्रिक कारें भी इसी तरह हैक होकर बंद की जा सकती हैं? इसका जवाब बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) और उसमें मौजूद सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। दरअसल, बीएटी-बीएमएस ऐप को लिथियम-आयन बैटरियों की निगरानी और रखरखाव के लिए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य बैटरी का चार्ज लेवल, तापमान, सेल की स्थिति और अन्य तकनीकी जानकारियां उपलब्ध कराना है। लेकिन कुछ शरारती तत्व उन ई-रिक्शों को निशाना बना रहे हैं, जिनकी बैटरियों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है।

कमजोर बीएमएस सुरक्षा बन सकती है खतरा

विशेषज्ञों के मुताबिक, कई सस्ते ई-रिक्शों में ब्लूटूथ-सक्षम बीएमएस लगा होता है। यदि इस सिस्टम पर पासवर्ड या पिन सुरक्षा नहीं है, तो करीब 10 से 15 मीटर की दूरी से कोई भी व्यक्ति मोबाइल ऐप के जरिए उससे कनेक्ट हो सकता है। कनेक्शन बनने के बाद यदि ऐप में मौजूद पावर या डिस्चार्ज कंट्रोल को बंद कर दिया जाए, तो बैटरी से मोटर तक बिजली की आपूर्ति रुक जाती है और ई-रिक्शा चलना बंद हो सकता है।

हर ई-रिक्शा खतरे की जद में नहीं

हालांकि, यह खतरा सभी ई-रिक्शों पर लागू नहीं होता। जिन बैटरियों में ब्लूटूथ पासवर्ड, पिन या अन्य सुरक्षा प्रणाली से सुरक्षित है, उनमें अनधिकृत व्यक्ति कनेक्ट नहीं हो सकता। वहीं, पारंपरिक लेड-एसिड बैटरी वाले ई-रिक्शों में ब्लूटूथ आधारित बीएमएस नहीं होता, इसलिए उनमें इस तरह की समस्या नहीं आती।

इलेक्ट्रिक स्कूटर और कारें सुरक्षित?

इलेक्ट्रिक स्कूटर और इलेक्ट्रिक कारों को लेकर भी लोगों में भ्रम है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिष्ठित कंपनियों के अधिकांश इलेक्ट्रिक स्कूटर और लगभग सभी इलेक्ट्रिक कारों में अत्याधुनिक बीएमएस, डेटा एन्क्रिप्शन, सुरक्षित संचार प्रणाली, पासवर्ड सुरक्षा और क्लाउड आधारित प्रमाणीकरण जैसी कई सुरक्षा परतें होती हैं। ऐसे वाहनों को केवल ब्लूटूथ के जरिए किसी सामान्य मोबाइल ऐप से बंद करना लगभग असंभव है।

ई-रिक्शा मालिकों के लिए सलाह

विशेषज्ञ ई-रिक्शा मालिकों और संचालकों को सलाह देते हैं कि वे अपनी बैटरी के बीएमएस की सुरक्षा जरूर जांचें। यदि ब्लूटूथ बिना पासवर्ड के खुला है, तो उसे तुरंत सुरक्षित कराएं या निर्माता से सुरक्षा अपडेट लें। विशेषज्ञों का कहना है कि बीएटी- बीएमएस जैसे ऐप अपने आप में खतरा नहीं हैं, बल्कि कमजोर सुरक्षा वाली बैटरियों में उनका गलत इस्तेमाल चिंता का विषय है। इसलिए बैटरी निर्माताओं और वाहन मालिकों दोनों को साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि तकनीक लोगों की सुविधा बढ़ाए, न कि सुरक्षा के लिए खतरा बने।


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