Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles

मध्य पूर्व में महायुद्ध की आहट, बंद हो सकता है दुनिया का 20 प्रतिशत तेल

वॉशिंगटन। मध्य पूर्व के क्षितिज पर युद्ध के काले बादल गहरा गए हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और सैन्य हलचलों के बीच यह संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक विशाल और हफ्तों तक चलने वाले सैन्य अभियान को हरी झंडी देने के बेहद करीब हैं। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय से छनकर आ रही रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना को पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है और इस सप्ताहांत तक ईरान पर बड़े हमले शुरू किए जा सकते हैं। इस संभावित सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य केवल ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करना नहीं, बल्कि वहां शासन परिवर्तन (रिजीम चेंज) लाना बताया जा रहा है।

अमेरिका ने ईरान के तट के पास अपनी सैन्य शक्ति को अब तक के सबसे अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है। नौसेना की तैनाती की बात करें तो ईरान के करीब इस समय दो विशाल विमान वाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) और एक दर्जन से अधिक आधुनिक युद्धपोत तैनात हो चुके हैं। वायुसेना की ताकत को बढ़ाने के लिए क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में एफ-35, एफ-22 और एफ -16 जैसे घातक लड़ाकू विमानों की खेप पहुंच चुकी है।

रसद और हथियारों की आपूर्ति के लिए पिछले 24 घंटों में 150 से अधिक सैन्य कार्गो उड़ानों के जरिए भारी मात्रा में गोला-बारूद अमेरिकी ठिकानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा, जापान, जर्मनी और हवाई से विशेष ई-3 अर्ली वार्निंग विमानों को सऊदी अरब भेजा गया है, जो बड़े पैमाने पर हवाई हमलों के समन्वय और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।इस संभावित टकराव की मुख्य वजह कूटनीतिक वार्ताओं का पूरी तरह विफल होना है। जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व में ईरान के साथ परमाणु विकास रोकने को लेकर जो बातचीत शुरू हुई थी, वह बेनतीजा रही। ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप की परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि अब अमेरिका और इजरायल मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन चला सकते हैं, जिसका लक्ष्य ईरान की वर्तमान सत्ता संरचना को बदलना होगा।

ईरान ने भी अमेरिका की इस घेराबंदी का कड़ा जवाब देने की तैयारी कर ली है। जवाबी कार्रवाई के तौर पर ईरान ने सैन्य अभ्यास के बहाने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से बंद कर दिया है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ईरानी नेतृत्व और अयातुल्ला ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उन पर हमला हुआ, तो वे अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाएंगे और वैश्विक तेल आपूर्ति को पूरी तरह ठप कर देंगे। यदि यह मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह विनाशकारी साबित होगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी। अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी इस फैसले को लेकर घमासान शुरू हो गया है। रिपब्लिकन खेमा इसे राष्ट्रपति की मजबूत छवि और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम मान रहा है, जबकि डेमोक्रेट्स ने इसका कड़ा विरोध किया है। हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति ट्रंप अकेले युद्ध का फैसला नहीं ले सकते और किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य है।फिलहाल, युद्ध की औपचारिक शुरुआत नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी सेना स्टैंडबाय मोड पर है। पूरी दुनिया की नजरें अब व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप शांति का कोई अंतिम रास्ता चुनेंगे या फिर 2003 के इराक युद्ध के बाद दुनिया के सबसे बड़े और परिणामी सैन्य आक्रमण का आदेश देंगे।

Comments (0)

Leave a Comment