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मिडिल ईस्ट में तनाव 2027 तक जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमतें छूएंगी आसमान

वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी बीच आईएमएफ ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। आईएमएफ का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा खिंचता है और तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो दुनिया को धीमी आर्थिक वृद्धि और ऊंची महंगाई जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आईएमएफ प्रमुख ने कहा है कि पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 3.1 फीसदी और महंगाई 4.4 फीसदी के आसपास रहेगी। लेकिन मौजूदा हालात तेजी से बदल रहे हैं और पुराने अनुमान अब अप्रासंगिक साबित होते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव 2027 तक जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है।

संस्था का मानना है कि खराब स्थिति वाले अनुमान अब वास्तविकता के करीब दिखाई दे रहे हैं। ऐसे हालात में 2026 तक वैश्विक वृद्धि दर घटकर 2.5 फीसदी तक आ सकती है, जबकि महंगाई बढ़कर 5.4 फीसदी तक पहुंच सकती है। सबसे गंभीर स्थिति में ग्लोबल ग्रोथ रेट 2 फीसदी तक सिमट सकती है और महंगाई 5.8 फीसदी तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक हॉर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता सबसे बड़ी चिंता है। दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। यदि यहां किसी तरह की बाधा जारी रहती है, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कमी पैदा हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि ये देश बड़े पैमाने पर तेल आयात पर निर्भर हैं। तेल सप्लाई प्रभावित होने से मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन बढ़ सकता है, जिससे आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं।

आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। उर्वरकों की कीमतों में 30 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है। संस्था का मानना है कि यदि सरकारें जल्दबाजी में मांग बढ़ाने वाले कदम उठाती हैं, तो महंगाई और ज्यादा बेकाबू हो सकती है। ऐसे में देशों को संतुलित आर्थिक नीतियां अपनाने की जरूरत होगी, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़े संकट से बचाया जा सके।

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