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पंजाब चुनाव के बाद गिर जाएगी मोदी सरकार-केजरीवाल

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने भविष्यवाणी की कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आखिरी चुनाव साबित होंगे। उनके अनुसार, जिस तरह प्राचीन काल में अश्वमेध घोड़े को रोका जाता था, उसी तरह पंजाब भाजपा के इस अजेय होने के भ्रम को तोड़ देगा और यहीं से केंद्र सरकार के पतन की शुरुआत होगी। केजरीवाल ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि भाजपा का विजय रथ आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में निश्चित तौर पर रुकेगा। हाल ही में पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद उभरे राजनीतिक माहौल के बीच केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावों में हेरफेर और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के जरिए लोकतंत्र की हत्या कर रही है। मंगलवार को विधायकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जो कुछ भी हुआ, वह चुनाव नहीं था, बल्कि सत्ता का एक ऐसा खेल था जिसे देश महीनों से देख रहा है।

केजरीवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा प्रतिद्वंद्वी पार्टियों को हराने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई दूसरी पार्टी जीत भी जाए, तो धन-बल और विधायकों की खरीद-फरोख्त के जरिए सरकारों को गिरा दिया जाता है। पंजाब में अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए केजरीवाल ने दावा किया कि राज्य में सत्ता विरोधी नहीं बल्कि सत्ता समर्थक लहर चल रही है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर चार साल बाद सरकारों के खिलाफ नाराजगी दिखती है, लेकिन पंजाब के गांवों में लोग आम आदमी पार्टी के काम की सराहना कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने उन सात राज्यसभा सांसदों पर भी निशाना साधा, जिन्होंने हाल ही में पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। उन्होंने इसे पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात बताया और कहा कि पंजाबियों ने हमेशा विदेशी आक्राताओं को रोका है, और इस बार वे अपने भीतर छिपे दुश्मनों को भी करारा जवाब देंगे। उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर दल बदलने वाले सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। दूसरी ओर, भाजपा नेतृत्व पश्चिम बंगाल की सफलता से उत्साहित है और उसे विश्वास है कि 2027 में पंजाब में भी वे इसी तरह का परिणाम दोहराएंगे। फिलहाल, केजरीवाल के इस आक्रामक रुख ने पंजाब की सियासी तपिश को समय से पहले ही बढ़ा दिया है।

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