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मंदिरों में प्रसाद बनाना बंद

नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भारत की रसोई और अर्थव्यवस्था पर गहरा आघात किया है। हालात इतने ज्यादा खराब है कि देश के प्रमुख शहरों के मेन्यू से खास व्यंजन गायब हो गए हैं। कोलकाता के रेस्तरां ने हांडी बिरयानी और मटन रेजाला जैसे ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजन हटा दिए हैं। शैक्षणिक संस्थानों जैसे एनएलआईयू और आईआईएसईआर भोपाल के मेस में स्नैक्स बंद कर दिए गए हैं और खाना पकाने के लिए कोयले का सहारा लिया जा रहा है। गुजरात में कुछ होटलों ने रोटियों की संख्या आधी कर दी है, जबकि कोलकाता के देसून अस्पताल ने ईंधन बचाने के लिए केवल शाकाहारी भोजन परोसने का निर्णय लिया है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से देश भर में तरल पेट्रोलियम गैस की भारी कमी हो गई है। यह संकट अब केवल कीमतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने आम आदमी के भोजन, रोजगार और दैनिक दिनचर्या को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। गैस की किल्लत के चलते कालाबाजारी चरम पर है और देश के कई हिस्सों में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर हैं। दक्षिण भारतीय राज्यों में स्थिति भयावह होती जा रही है। तमिलनाडु में घरेलू गैस सिलेंडर की भारी कालाबाजारी हो रही है, जहाँ 1,400 रुपये का सिलेंडर 2,800 रुपये तक में बिक रहा है। ईंधन की इस कमी के कारण केरल के 40 प्रतिशत और कर्नाटक के 30 प्रतिशत भोजनालय अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में भी हाहाकार है; नागपुर के हिंगना औद्योगिक एस्टेट के 70 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्योगों ने परिचालन में गंभीर बाधाओं की रिपोर्ट दी है। कई जगहों पर होटलों ने गैस की कमी का बहाना बनाकर मनमाने दाम वसूलना शुरू कर दिया है।

गैस संकट का असर अब श्रद्धा और परंपराओं पर भी दिख रहा है। सिकंदराबाद के ऐतिहासिक श्री गणेश मंदिर ने गैस की कमी के कारण अन्नदान और प्रसादम का वितरण रोक दिया है। चोरी की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, जहाँ तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में होटलों से कमर्शियल सिलेंडर चुराए जा रहे हैं। पंजाब के बरनाला में गैस की कतार में लगे एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की मौत ने इस संकट की गंभीरता को रेखांकित किया है। चेन्नई जैसे शहरों में चाय-कॉफी की कीमतों में भारी उछाल आया है क्योंकि कमर्शियल गैस की कीमतें 5,000 रुपये तक पहुंच गई हैं। शहरी इलाकों में अग्नि सुरक्षा नियमों के कारण लकड़ी का उपयोग संभव नहीं है, जिससे होटल व्यवसाय पूरी तरह ठप हो रहा है। इस बीच, कानपुर जैसे व्यापारिक केंद्रों में बिजली से चलने वाले इंडक्शन कुकटॉप की मांग में अभूतपूर्व तेजी देखी जा रही है।

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