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नीट पेपर लीक का पर्दाफाश

जयपुर। नीट यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले में देश को हिलाकर रख देने वाले मुख्य व्हिसलब्लोअर राजस्थान के सीकर में कार्यरत केमिस्ट्री शिक्षक शशिकांत सुथार हैं। मूल रूप से राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रहने वाले शशिकांत सुथार के एक ईमेल ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया, जिसके बाद 22 लाख छात्रों की इस प्रतिष्ठित परीक्षा को रद्द करना पड़ा। शशिकांत ने बताया कि 3 मई को परीक्षा समाप्त होने के बाद जब उन्होंने प्रश्न पत्र की समीक्षा की, तब उनके मकान मालिक ने उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक गेस पेपर की पीडीएफ फाइल दिखाई। जब उन्होंने इस पीडीएफ के केमिस्ट्री वाले हिस्से की जांच की, तो वह यह देखकर दंग रह गए कि परीक्षा में पूछे गए सभी 45 सवाल उस पीडीएफ से हूबहू मैच हो रहे थे।

इसके बाद शशिकांत ने एक साथी शिक्षक की मदद से बायोलॉजी के प्रश्नों का भी मिलान किया, जिसमें करीब 90 सवाल पूरी तरह समान पाए गए। मामला बेहद गंभीर होने के कारण उन्होंने उसी रात स्थानीय पुलिस प्रशासन से संपर्क किया, जहां उनसे लिखित शिकायत और साक्ष्य मांगे गए। इसके बाद अगले चार दिनों तक उन्होंने वायरल पीडीएफ, स्क्रीनशॉट और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत जुटाए। उन्होंने 7 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए), सीबीआई और शिक्षा मंत्रालय को ईमेल के जरिए ये सारे सबूत भेजे। अगले ही दिन से जांच एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस फर्जीवाड़े में शामिल लोगों का पर्दाफाश करना शुरू कर दिया।

शशिकांत के अनुसार, परीक्षा के 180 में से लगभग 135 सवाल लीक हुए थे, हालांकि उनके पास फिजिक्स के पेपर से संबंधित कोई पीडीएफ उपलब्ध नहीं थी। आगामी सत्र से इस परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग मोड में कराने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ऑनलाइन मोड भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इसके बजाय नीट यूजी परीक्षा को दो चरणों (प्री और मेन्स) में आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि यदि एक चरण में कोई गड़बड़ी हो भी, तो दूसरे चरण में फर्जीवाड़े को रोका जा सके। सीकर को पेपर लीक का केंद्र बताए जाने वाली खबरों पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी बाहरी राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, नासिक और गुड़गांव) से हैं और सीकर के ग्रामीण परिवेश से आने वाले मेहनती छात्रों और शिक्षकों की छवि को धूमिल नहीं किया जाना चाहिए। पिछले 12 वर्षों से शिक्षण कार्य से जुड़े शशिकांत ने कहा कि कोटा में खुद तैयारी करने के कारण वे छात्रों के संघर्ष और उनके बलिदान को अच्छी तरह समझते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना, अपने सब-इंस्पेक्टर भाई और पिता के मानसिक सहयोग से इस बड़े घोटाले को उजागर करने का ऐतिहासिक कदम उठाया।

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