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ट्रंप बोले दो-चार दिन में ईरान पर फिर हमला करेंगे

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान पर नए सैन्य हमलों की घोषणा की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ गई है। उनके अनुसार, आने वाले दो से चार दिनों के भीतर अमेरिका ईरान पर नए स्ट्राइक्स कर सकता है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार, शनिवार, रविवार या अगले हफ्ते की शुरुआत में ईरान पर फिर से बड़ा सैन्य हमला किया जा सकता है। हालांकि, रक्षा और विदेश मामलों के विशेषज्ञ राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान को केवल माहौल बनाने के लिए की गई खोखली बयानबाजी मान रहे हैं।

इससे पहले भी ट्रंप ने युद्ध की आशंकाओं को हवा देते हुए कहा था कि वह व्यापक युद्ध की स्थिति से बचना चाहते हैं, लेकिन ईरान को एक और बड़ा झटका देना बेहद जरूरी हो सकता है। जब उनसे संभावित हमले की समयसीमा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत सीमित समय का हवाला देते हुए अगले कुछ दिनों के भीतर ही कार्रवाई की बात दोहराई। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप का यह आक्रामक बयान उनके पिछले दावे के बिल्कुल विपरीत है। इससे ठीक एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे खाड़ी देशों के विशेष अनुरोध के बाद उन्होंने ईरान पर हमले की योजना को फिलहाल टाल दिया है। हालांकि, खाड़ी देशों ने तुरंत ही अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे का खंडन करते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया था। सीजफायर लागू होने के बाद से ट्रंप लगातार इस तरह की धमकियां दे रहे हैं, लेकिन अब तक कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसी किसी भी धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है।

बाजार और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बार-बार धमकी देकर पीछे हट जाने के कारण अब अमेरिकी बयानों का असर कम होने लगा है। शुरुआत में इस तरह की चेतावनियों से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता था, लेकिन अब वित्तीय बाजार समझ चुका है कि जब तक जमीनी स्तर पर कोई वास्तविक कार्रवाई नहीं होती, तब तक इन बयानों का कोई खास महत्व नहीं है। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह ठप है और दोनों ही पक्ष अपनी पुरानी मांगों पर अड़े हुए हैं। इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में भी ईरान संकट पर मुख्य रूप से चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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