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राष्ट्रपति ट्रंप ने किया डील का ऐलान

वाशिंगटन। लंबे समय से गंभीर सैन्य और कूटनीतिक तनाव का केंद्र रहे मध्य पूर्व क्षेत्र से एक बेहद बड़ी और राहत भरी वैश्विक खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर पूर्ण सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महाडील का आधिकारिक ऐलान करते हुए रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने की घोषणा की है। इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई सख्त समुद्री नाकाबंदी को भी तुरंत प्रभाव से हटाने की मंजूरी दे दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता की घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर की। उन्होंने बेहद उत्साहजनक लहजे में लिखा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी तरह संपन्न हो चुकी है और वे इस उपलब्धि के लिए सभी को बधाई देते हैं। ट्रंप ने आगे लिखा कि इस समझौते के साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाया जा रहा है, ताकि दुनिया भर के वाणिज्यिक जहाज बिना किसी रोक-टोक के अपनी आवाजाही फिर से शुरू कर सकें। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देने का संदेश देते हुए लिखा, दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो और तेल की सप्लाई शुरू होने दो। ट्रंप ने अपनी एक अन्य पोस्ट में जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच इस शांति समझौते पर अगले शुक्रवार को आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपतियों की विफलताओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि यह शानदार डील पूरे इलाके में स्थायी शांति और सुरक्षा लाएगी। समझौते पर दस्तखत होने के बाद जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाने का काम शुरू होगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलेगी।

दूसरी तरफ, ईरान की ओर से भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक कूटनीतिक संकेत मिले हैं। हालांकि ईरान की सरकार ने अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन वहां के सुरक्षा सूत्रों के अनुसार जल्द ही सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से इस सीजफायर समझौते को लेकर औपचारिक घोषणा की जाएगी। इस बीच यह भी साफ किया गया है कि खाड़ी क्षेत्र से होने वाले समुद्री यातायात के नियंत्रण की जिम्मेदारी ईरान और ओमान मिलकर संभालेंगे। ईरान के कानूनी और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री डॉ. गरीबाबादी ने भी पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है और आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। ईरानी उप विदेश मंत्री ने साफ किया कि यह समझौता दुश्मन के प्रति सक्रिय अविश्वास पर आधारित है और इसमें ईरान के सभी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हितों को शामिल किया गया है।

ईरानी प्रशासन के अनुसार, अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकाबंदी का अंत होने के साथ ही लेबनान सहित कई अन्य मोर्चों पर जारी सैन्य ऑपरेशन हमेशा के लिए थम जाएंगे। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते के मसौदे में उसकी मुख्य शर्तों में से एक यह थी कि इजरायल को हर हाल में दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना को पूरी तरह बाहर निकालना होगा। ईरान की शीर्ष सैन्य कमान ने इस घटनाक्रम को अपनी रणनीतिक जीत बताते हुए कहा है कि देश की मजबूत कूटनीति ने अमेरिका को अपने रुख में नरमी लाने और झुकने पर मजबूर कर दिया है। इस समझौते से वैश्विक स्तर पर युद्ध के टलने और आर्थिक स्थिरता आने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

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