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तेल हुआ सस्ता

न्यूयॉर्क । रविवार को ईरान युद्ध खत्म करने और सामरिक होरमुज जलडमरूमध्य को खोलने का समझौता होने से वैश्विक राहत मिली है। हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल और पेट्रोल की ऊंची कीमतें तथा ऊर्जा आपूर्ति की समस्याएं रातों-रात हल नहीं होंगी। दुनिया की मांग पूरी करने लायक कामकाज फिर से शुरू करने में ऊर्जा कंपनियों को महीनों का समय लग सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की शिपिंग और रिफाइनिंग की धीमी प्रक्रिया के साथ-साथ जलडमरूमध्य से गुजरने की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता का मतलब है कि इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा। युद्ध से पहले दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल और पेट्रोल आपूर्ति इसी मार्ग से होती थी, लेकिन युद्ध के कारण तीन महीने से ज़्यादा समय से सैकड़ों तेल से लदे जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के एक अघ्धिकारी ने बताया कि लोगों को सुरक्षित महसूस करने और इंश्योरेंस की व्यवस्था होने में समय लगेगा। हालांकि, सोमवार को डील की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में शुरुआती गिरावट आई; ब्रेंट क्रूड 3.45 डॉलर गिरकर 83.89 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी बेंचमार्क 4.03 डॉलर गिरकर 80.85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। फिर भी ये कीमतें युद्ध शुरू होने से पहले की 70 डॉलर प्रति बैरल से काफी ऊपर हैं। फंसे हुए जहाजों को निकालने, नए टैंकरों को लोड करने और धीमी गति से चलने वाले तेल टैंकरों को अपनी अंतिम मंजिल तक पहुंचने में महीनों लग सकते हैं। इसके अलावा, शट-इन यानी बंद पड़े तेल कुओं को फिर से शुरू करना भी एक धीमी प्रक्रिया है।

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