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तबाही मचाने आ रहा है महातूफान बावी

नई दिल्ली। प्रशांत महासागर में उठा फ्रांस के आकार का महाविनाशकारी टाइफून बावी अब ताइवान और चीन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले इस शक्तिशाली तूफान के कारण ताइवान, चीन और जापान में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। गुरुवार को यह तूफान ताइवान के दक्षिण-पूर्व में पहुंच गया है, हालांकि रात भर में इसकी हवाओं की गति में मामूली कमी आई है, लेकिन इसका खतरा अभी भी बहुत बड़ा है। प्रशासन ने इसे कई वर्षों में सबसे शक्तिशाली तूफान बताते हुए निवासियों से अपील की है कि वे जरूरी सामानों का स्टॉक कर लें और किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहें। मौसम विज्ञान के आंकड़ों के अनुसार, टाइफून बावी का भारत पर सीधा कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दरअसल, यह महातूफान प्रशांत महासागर में बना है और इसका ट्रैक उत्तर-पश्चिम की ओर, यानी ताइवान, पूर्वी चीन और दक्षिणी जापान की ओर है, इसलिए भारत के किसी भी तटीय इलाके में इसके टकराने की कोई आशंका नहीं है। हालांकि, मौसम विज्ञान के नजरिए से प्रशांत महासागर के इतने विशाल तूफानों का एशियाई मौसम प्रणालियों पर अप्रत्यक्ष असर जरूर देखने को मिलता है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, टाइफून बावी के विशाल घेरे के कारण फिलीपींस और दक्षिण-चीन सागर के आसपास चलने वाला दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (हबागाट) काफी तीव्र हो गया है। बावी के असर से वहां भारी बारिश और बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है। इसका मतलब है कि तूफान ने उस क्षेत्र के मानसून को अतिरिक्त ऊर्जा दे दी है, जो आमतौर पर भारतीय सिस्टम से नमी को दूर ले जाता है।

1,000 किमी के क्षेत्र में फैला

वर्तमान में, यह तूफान अपने सबसे चौड़े बिंदु पर लगभग 1,000 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है, जो आकार में लगभग फ्रांस देश की चौड़ाई के बराबर है। चीन के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, यह तूफान ताइवान के उत्तरी हिस्से को छूते हुए शनिवार शाम को चीन के पूर्वी फुजियान प्रांत के तटों से टकराएगा। ताइवान के केंद्रीय मौसम प्रशासन के अधिकारी जेसन चांग ने बताया कि आकार के लिहाज से यह 1987 के बाद ताइवान से टकराने वाला सबसे बड़ा तूफान है, और हाल के वर्षों में इतने बड़े आकार के तूफानों का आना बहुत दुर्लभ रहा है। 

चीन और जापान व ताइवान का हाल

भारत के पड़ोसी देश चीन और जापान व ताइवान जैसे देश जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार विनाशकारी मौसमी घटनाओं का सामना कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह साल विशेष चिंता का विषय है क्योंकि अल नीनो प्रभाव के उभरने की उम्मीद है, जिसके कारण समुद्र का तापमान बढ़ता है और इस तरह के टाइफून अधिक बार तथा कहीं ज्यादा विनाशकारी रूप में आते हैं। एक्यूवेदर के अनुसार, अगर टाइफून बावी अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखता है, तो यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2024 में आए सुपर टाइफून कोंग-रे के बाद सबसे शक्तिशाली तूफान बन जाएगा।

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