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टीएमसी के बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में किया विलय

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रही आंतरिक कलह अब देश की राजधानी दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में एक बड़े संकट के रूप में सामने आ गई है। टीएमसी के बागी सांसदों ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी नाम के एक मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल में अपना विलय कर लिया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद बागी धड़े के सांसदों ने दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य संसद के भीतर बागी गुट के लिए बैठने की अलग व्यवस्था करने की मांग करना था। 

लोकसभा स्पीकर से मुलाकात के बाद बागी टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने तकनीकी और कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी के साथ विलय का फैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब असली टीएमसी कौन है, इस बात का अंतिम फैसला अदालत की चौखट पर ही होगा। लोकसभा अध्यक्ष से मिलने से पहले बागी सांसदों की गतिविधियों ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया, जब यह गुट भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचा। बागी खेमे की प्रमुख सांसद काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, सायनी घोष, माला रॉय और अरूप चक्रवर्ती समेत कई बड़े चेहरों ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में दो और सांसद उनके इस बागी गुट में शामिल होने वाले हैं। अगर ऐसा होता है, तो लोकसभा में इस विद्रोही गुट के सदस्यों की कुल संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी। 

एनडीए का करेंगे समर्थन

कयास लगाए जा रहे हैं कि यह नया गुट केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को अपना समर्थन करेगा। इस नई पार्टी का मुख्य राजनीतिक ध्यान पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों पर केंद्रित रहेगा। दूसरी तरफ, संकट गहराते देख कोलकाता में भी हलचल तेज रही, जहां टीएमसी के वरिष्ठ नेता गौतम देब और चंद्रिमा भट्टाचार्य स्थिति को संभालने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर पहुंचे जहां लंबी चर्चा की।

ममता खेमे ने दल बदलू कानून की याद दिलाई

इस बीच, ममता बेनर्जी के वफादार खेमे ने बागियों के इस कदम पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें दलबदल विरोधी कानून की याद दिलाई। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए साफ किया कि देश के संविधान और दलबदल विरोधी कानून के तहत ऐसा कोई कानूनी प्रावधान ही नहीं है जिसके तहत कोई भी अलग गुट सदन के भीतर अपनी मर्जी से काम कर सके, जबकि वे मूल पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर आए हों। घोष ने कानून का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी सांसद या विधायक अयोग्यता से तभी बच सकता है जब उनकी मूल राजनीतिक पार्टी का किसी दूसरी पार्टी में औपचारिक रूप से विलय हो जाए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक बागी नेता अपनी सदस्यता खो देंगे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर जीतकर संसद में रहते हुए अपनी ढपली बजाना पूरी तरह गैर-कानूनी है। बागी नेताओं के सामने केवल दो ही रास्ते हैंकृया तो वे पूरी तरह नई पार्टी में विलय कर लें या फिर सदन की सदस्यता से हाथ धोकर अयोग्य घोषित होने के लिए तैयार रहें, अन्यथा संसद में उनकी मौजूदगी पूरी तरह अमान्य मानी जाएगी।

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