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15 जुलाई से लागू होने जा रहा भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता

नई दिल्ली । भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हो जाएगा है। फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने यह घोषणा की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताकर कहा कि यह समझौता व्यापार, निवेश और रोजगार के नए मौकों का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस समझौते पर जुलाई 2025 में हस्ताक्षर हुए थे और अब इसके लागू होने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। समझौते के प्रभावी होने से पहले उद्योगों और कारोबारियों को नई व्यवस्था के अनुरूप अपने व्यापारिक ढांचे और रणनीतियों को तैयार करने का समय दिया है। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

एफटीए के तहत भारतीय निर्यातकों को ब्रिटिश बाजार में बड़ी राहत मिलने वाली है। ब्रिटेन भारतीय कपड़ा, फुटवियर, कृषि एवं खाद्य उत्पादों सहित कई वस्तुओं पर आयात शुल्क में कमी करेगा। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और उन्हें ब्रिटिश बाजार में अधिक अवसर मिलने है। विशेष रूप से श्रम-प्रधान उद्योगों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा। भारतीय पेशेवरों के लिए भी समझौता महत्वपूर्ण साबित होगा। ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय कुशल कर्मचारियों को दोहरे सोशल सिक्योरिटी योगदान से छूट की अवधि 36 महीने से बढ़ाकर 60 महीने कर दी गई है। इस बदलाव से भारतीय कंपनियों और कर्मचारियों दोनों का वित्तीय बोझ कम होगा तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेशेवरों की आवाजाही आसान बनेगी। दूसरी ओर, भारत ने भी ब्रिटिश उत्पादों के लिए अपने बाजार में अधिक पहुंच देने पर सहमति जाहिर की है। समझौते के तहत ब्रिटिश व्हिस्की पर आयात शुल्क में भारी कटौती की जाएगी। साथ ही निर्धारित कोटा व्यवस्था के अंतर्गत ब्रिटिश ऑटोमोबाइल पर लगने वाले शुल्क को भी काफी कम करेगा। इससे ब्रिटिश कंपनियों को भारतीय बाजार में बेहतर अवसर मिलने और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल शुल्क कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, तकनीकी सहयोग, सेवा क्षेत्र और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उस समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था नए व्यापारिक साझेदारों और बाजारों की तलाश कर रही है, भारत-ब्रिटेन एफटीए दोनों देशों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, इससे भारत के निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि ब्रिटिश निवेशकों को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत में नए मौके प्राप्त होने है। यह समझौता आने वाले वर्षों में दोनों देशों की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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