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नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली में बच्चों की खाने की आदतों में जंक फूड का शामिल होना चिंता का विषय बन गया है। इसलिए, यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि इस उम्र में बच्चों की डाइट कैसी होनी चाहिए ताकि उनका विकास सही दिशा में हो सके और वे भविष्य के लिए पूरी तरह से तैयार रहें। बच्चों के शरीर को स्वस्थ रूप से बढ़ने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत प्रोटीन की होती है। प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, मांसपेशियों को मजबूत करने और चोट लगने पर उनकी मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि बच्चे की डाइट में दालें, दूध, दही, पनीर, अंडा, सोया, चना या चिकन जैसे उच्च प्रोटीन स्रोत शामिल किए जाते हैं, तो उनका शारीरिक विकास बेहतर तरीके से होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन बच्चों को नियमित रूप से पर्याप्त प्रोटीन मिलता है, उनकी शारीरिक वृद्धि और शक्ति दूसरों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर होती है। इसके साथ ही, कैल्शियम और विटामिन डी हड्डियों के मजबूत विकास के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। इस उम्र में हड्डियां तेजी से मजबूत होती हैं, इसलिए दूध, दही, पनीर और रागी जैसे कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ बेहद जरूरी हैं। धूप में कुछ समय बिताना शरीर में प्राकृतिक रूप से विटामिन डी बनाने में मदद करता है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं और भविष्य में कमजोरी या दर्द जैसी समस्याओं का खतरा काफी कम हो जाता है। बच्चों के दिमाग और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) के लिए फल और सब्जियां बेहद जरूरी हैं।
इनमें मौजूद विभिन्न विटामिन, मिनरल और फाइबर शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। जो बच्चे रोज अलग-अलग रंग के फल और सब्जियां खाते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है और वे बीमारियों की चपेट में कम आते हैं। साथ ही, उनका ध्यान केंद्रित करने और सीखने की क्षमता भी बेहतर रहती है, जो उनकी पढ़ाई और समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। ऊर्जा के निरंतर प्रवाह के लिए साबुत अनाज जैसे गेहूं, ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और मल्टीग्रेन फूड्स बहुत उपयोगी होते हैं। ये धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ते हैं, जिससे बच्चे लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं और उनकी एकाग्रता बनी रहती है। विशेषज्ञ बच्चों को रिफाइंड आटे की बजाय साबुत अनाज देने की सलाह देते हैं क्योंकि इनमें पोषक तत्व और फाइबर अधिक होते हैं। दिमाग के तेज विकास के लिए हेल्दी फैट भी बहुत आवश्यक माना जाता है। बादाम, अखरोट, मूंगफली और विभिन्न बीजों जैसे चिया सीड या फ्लैक्स सीड में मौजूद पोषक तत्व बच्चों की याददाश्त और नई चीजों को सीखने की क्षमता को बढ़ाते हैं।
इसके अलावा, पर्याप्त पानी पीना भी उतना ही जरूरी है। शरीर का सही संतुलन बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह पाचन, ऊर्जा के स्तर और दिमागी कार्यों को बेहतर रखता है। वहीं, मीठे और कार्बाेनेटेड ड्रिंक्स बच्चों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही रखना चाहिए या पूरी तरह से परहेज करना चाहिए ताकि बच्चों का स्वस्थ विकास सुनिश्चित हो सके। विशेषज्ञों की माने तो 5 से 12 साल की उम्र बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह वह समय होता है जब बच्चे तेजी से बढ़ते हैं, उनकी हड्डियां मजबूत होती हैं, मांसपेशियां विकसित होती हैं और दिमाग नई चीजों को सीखने की क्षमता को तेजी से बढ़ाता है। इस नाजुक उम्र में मिला सही पोषण बच्चे के पूरे जीवन की सेहत और मानसिक क्षमता की नींव रखता है।
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