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सैमसन इन कारणों से टीम इंडिया से बाहर हुए

मुम्बई । भारतीय क्रिकेट में कुछ ही खिलाड़ी ऐसे हैं जिनका करियर संजू सैमसन जितना उतार-चढ़ाव भरा रहा हो। हाल ही में संपन्न हुए टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम को जीत दिलाने वाले सैमसन को अब टीम में अपनी जगह बनाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। आगामी जिम्बाब्वे दौरे के लिए भी उन्हें टी20 टीम में जगह नहीं मिली है। जिससे प्रशंसक हैरान हैं। इससे ये सवाल उठने लाजिमी हैं कि ऐसा क्या हुआ कि विश्व कप हीरो अचानक ही चयनकर्ताओं की प्राथमिकता सूची से बाहर हो गया है। 

तीन महीने पहले ही विश्व कप में अपनी निडर और मैच विजेता पारियों से टीम को मजबूत करने वाले सैमसन का बल्ला उसके बाद से खामोश है। आयरलैंड दौरे पर भी वह रन बनाने में सफल रहे। अच्छी शुरुआत को वे बड़ी पारी में नहीं बदल पाए और स्ट्राइक रोटेट करने में भी संघर्ष करते दिखे। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर पहले टी20 में भी उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें दूसरे मैच में युवा वैभव सूर्यवंशी के लिए प्लेइंग-11 से बाहर बैठना पड़ा। किसी भी खिलाड़ी के लिए बेंच पर बैठना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, और अब जिम्बाब्वे सीरीज से पूरी तरह बाहर होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि चयनकर्ताओं की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं।

सैमसन के करियर पर मंडराते इस संकट के पीछे तीन प्रमुख कारण दिखाई देते हैं। पहला, उनका फॉर्म। विश्व कप की शानदार लय को वे बरकरार नहीं रख पाए। आयरलैंड और इंग्लैंड में छोटी पारियां उनके खिलाफ गईं, जो टी20 क्रिकेट में चयन पर सीधा असर डालती हैं। दूसरा, टीम इंडिया में विकेटकीपर-बल्लेबाज की जगह के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा। भारतीय टीम में प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की लंबी कतार है, जिसमें वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी अपने लगातार अच्छे प्रदर्शन से शीर्ष क्रम में कई विकल्प पेश कर रहे हैं। तीसरा कारण टीम प्रबंधन की भविष्य की योजनाएं। 31 वर्षीय सैमसन की उम्र को देखते हुए, टीम प्रबंधन शायद अब युवा खिलाड़ियों को ज्यादा अवसर देकर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना चाहता है। माना जा रहा है कि इसी कारण जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज के लिए चयनकर्ताओं ने अनभवी खिलाड़ियों की जगह पर युवाओें को प्राथमिकता दी है। 

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सैमसन का करियर खत्म हो गया है। उनकी प्रतिभा पर कभी सवाल नहीं उठे, और उन्होंने अतीत में कई बार मुश्किल हालात से वापसी की है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में केवल क्षमता नहीं, बल्कि निरंतर प्रदर्शन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर उन्हें आगे मौका मिलता है, तो उन्हें बड़ी पारी खेलकर चयनकर्ताओं का विश्वास फिर से जीतना होगा। अन्यथा, बेंच पर बैठने और टीम से बाहर रहने का यह सिलसिला उनके लिए वापसी की राह को और कठिन बना देगा। 


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