Search

Shopping cart

Saved articles

You have not yet added any article to your bookmarks!

Browse articles

भारत का बड़ा कदम चाबहार-जहेदान रेल से मध्य एशिया का सीधा रास्ता

नई दिल्ली। भारत ने ईरान में 700 किलोमीटर लंबे रणनीतिक चाबहार-जहेदान रेल कॉरिडोर पर काम को पुनः सक्रिय करने की अपनी योजना को गति दे दी है। इस महत्वपूर्ण परियोजना का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों, जैसे उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान, तक भारत की पहुंच को सुगम बनाना है। यह रेल लाइन भारत के लिए क्षेत्र में एक नया व्यापारिक और रणनीतिक मार्ग खोलेगी, जिससे उसकी भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी।

यह परियोजना भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस परियोजना को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) और पाकिस्तान में विकसित किए गए ग्वादर पोर्ट का एक प्रभावी जवाब माना जा रहा है। चीन के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने और अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए, भारत चाबहार बंदरगाह और उससे जुड़े रेल लिंक को एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देख रहा है। यह भारत को मध्य एशियाई देशों के साथ सीधे आर्थिक संबंध स्थापित करने का मौका प्रदान करेगा, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ेगी। प्रस्तावित चाबहार-जहेदान रेल मार्ग ईरान के रणनीतिक चाबहार बंदरगाह को अफगानिस्तान सीमा के पास स्थित जहेदान से जोड़ेगा। इसके माध्यम से यह बंदरगाह ईरान के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) से एकीकृत होगा। इस रेल लिंक से भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशिया के बाजारों तक पहुंचने के लिए छोटा, तेज और लागत प्रभावी मार्ग मिलने की उम्मीद है, जिससे पाकिस्तान और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, यह भारत के लिए तेल निर्यात में भी आसानी प्रदान करेगा और पारंपरिक समुद्री व्यापार मार्गों पर उसकी निर्भरता को घटाएगा।

इस परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत करीब 1.5 अरब डॉलर है, जिसमें अधिकांश फंडिंग ईरान द्वारा की जाएगी। भारत आने वाले वर्षों में 400-500 मिलियन डॉलर का वित्तीय योगदान देगा और साथ ही अपनी इंजीनियरिंग विशेषज्ञता भी प्रदान करेगा। भारतीय रेलवे के पूर्व जनरल मैनेजर सुधांशु मणि ने परियोजना के रणनीतिक महत्व पर जोर देकर कहा है कि यह रेल लिंक चीन के प्रभाव, विशेषकर पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के प्रभाव को संतुलित करने का प्रयास है। यह भूमि से घिरे मध्य एशियाई देशों को हिंद महासागर तक पहुंचने का सबसे छोटा और सीधा समुद्री मार्ग भी प्रदान करता है, जिससे उनकी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

Comments (0)

Leave a Comment