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इंदौर। अपनी प्रेमिका के साथ क्रूरता करने वाले आरोपी पीयूष के पिता गहरे सदमे और आत्मग्लानि में डूबे हुए हैं। जिस बेटे को उन्होंने बड़े अरमानों के साथ अफसर बनाने के लिए शहर भेजा था, उसकी करतूत ने न केवल परिवार को समाज में कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। फफकते हुए पिता बताते हैं कि पीयूष बचपन से ही आईपीएस अधिकारी बनने का सपना देखता था, लेकिन वह रक्षक बनने के बजाय भक्षक बन गया। मंदसौर के रहने वाले इस परिवार की दुनिया अब पूरी तरह उजड़ चुकी है। आरोपी का जन्म रतलाम के बाजना गांव में हुआ था और उसकी प्रारंभिक शिक्षा मंदसौर में हुई। पिछले साल ही उसने उच्च शिक्षा के लिए इंदौर जाने की जिद की थी, जिसके बाद अगस्त 2025 में उसे एमबीए पाठ्यक्रम में प्रवेश दिलाया गया था।
शुरुआत में पीयूष इंदौर के अरविंदो क्षेत्र में एक रूम पार्टनर के साथ रहता था, लेकिन जल्द ही उसने नशा करने वाले साथियों की शिकायत कर कमरा बदल लिया। पिता को लगा कि उनका बेटा गलत संगति से दूर रहना चाहता है और अपनी पढ़ाई के प्रति गंभीर है। हालांकि, परिवार इस बात से पूरी तरह अनजान था कि पीयूष ने द्वारकापुरी क्षेत्र में कब और किसके माध्यम से नया कमरा किराये पर ले लिया।
पिता के अनुसार, पीयूष अक्सर अपनी मां से खर्च के पैसे मांगता था, जबकि वे खुद उसे हर महीने करीब आठ हजार रुपये भेजते थे। वह परिवार से अपनी गतिविधियों को छिपाने लगा था और झूठ का सहारा लेकर अपनी अलग दुनिया बसा रहा था। जनवरी के महीने में जब पीयूष मंदसौर आया, तो मोबाइल में एक युवती के साथ उसकी तस्वीरें देखकर पिता को संदेह हुआ। कड़ाई से पूछने पर उसने स्वीकार किया कि वह उस युवती को पसंद करता है।
पिता ने उस वक्त नाराजगी जताते हुए उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की सख्त हिदायत दी थी। इसके बाद पीयूष ने अपनी प्रेमिका की बात पिता से फोन पर करवाई थी। उस बातचीत के दौरान युवती ने भावुक होकर पिता को आश्वासन दिया था कि वे दोनों पहले अपने करियर पर ध्यान देंगे और शादी जैसा कोई भी फैसला परिवार की सहमति और सही समय आने पर ही लेंगे। युवती ने पिता की कसम खाते हुए कहा था कि वे केवल पढ़ाई करेंगे और पीयूष को वापस गांव न बुलाया जाए।
आज वही आश्वासन एक खौफनाक अंजाम में बदल चुका है। पिता बेहद आहत हैं कि जिस युवती ने उनकी कसम खाकर विश्वास जीता था, उसके साथ उनके बेटे ने ऐसी हैवानियत की। घर में दो बेटियां हैं और इकलौते बेटे की इस दरिंदगी ने मां को मानसिक रूप से तोड़ दिया है। पिता का कहना है कि समय के साथ शायद कोई गहरा दाग मिट जाए, लेकिन बेटे ने कुल पर जो कलंक लगाया है, वह कभी नहीं धुलेगा। गहरे दर्द और भारी मन से पिता ने अब अपने बेटे से सारे संबंध तोड़ने की बात कही है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे महत्वाकांक्षा और भटकाव के बीच की धुंधली रेखा एक होनहार दिखने वाले युवक को अपराधी बना देती है।
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