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अब नहीं लौटेगा कैंसर!

नई दिल्ली। कैंसर के इलाज की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। मॉडर्ना और मर्क की जॉइंट पर्सनलाइज़्ड कैंसर वैक्सीन ने स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक रूप यानी हाई-रिस्क मेलेनोमा के लेट-स्टेज क्लिनिकल ट्रायल में उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। इस तकनीक में कैंसर सर्जरी के बाद मरीजों को दोबारा कैंसर होने या ट्यूमर के शरीर के अन्य अंगों में फैलने से रोकने के लिए यह वैक्सीन दी जाती है। इस वैक्सीन को सर्जरी के बाद मेलेनोमा के दोबारा होने या फैलने के जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है। इस वैक्सीन का परीक्षण मर्क की व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा के साथ मिलाकर किया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों ने बताया कि इस इलाज ने कैंसर के दोबारा होने के जोखिम को कम करने का अपना मुख्य लक्ष्य हासिल कर लिया है और साथ ही मेलेनोमा के शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने के जोखिम को कम करने का दूसरा लक्ष्य भी पूरा किया। उम्मीद है कि इसके विस्तृत नतीजे जल्द ही पेश किए जाएंगे। ये नतीजे एमआरएनए कैंसर वैक्सीन के उभरते हुए क्षेत्र में अहम हैं। इन वैक्सीन को मरीज़ के इम्यून सिस्टम को इस तरह प्रशिक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि वे मरीज़ के ट्यूमर में पाए जाने वाले म्यूटेशन के आधार पर कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर सकें और उन पर हमला कर सकें। रिपोर्ट के मुताबिक वहीं संक्रमण को रोकने के लिए बनाई जाने वाली पारंपरिक वैक्सीन के विपरीत, पर्सनलाइज़्ड एमआरएनए कैंसर वैक्सीन खास तौर पर किसी एक मरीज़ के लिए विकसित की जाती हैं। सर्जरी के ज़रिए ट्यूमर को हटाने के बाद, उसके जेनेटिक म्यूटेशन का विश्लेषण करके ऐसे टारगेट की पहचान की जा सकती है जो इम्यून सिस्टम को बची हुई कैंसर कोशिकाओं को पहचानने में मदद कर सकें।

फेज़ 3 ट्रायल में हाई-रिस्क स्टेज वाले मेलेनोमा के 1,137 मरीज़ों को शामिल किया गया जिनके ट्यूमर सर्जरी के ज़रिए हटा दिए गए थे। प्रतिभागियों को रैंडम तरीके से दो ग्रुप में बांटा गया। एक ग्रुप को करीब एक साल तक कीट्रूडा के साथ पर्सनलाइज़्ड एमआरएनए वैक्सीन दी गई और दूसरे ग्रुप को सिर्फ़ कीट्रूडा दी गई। बता दें मॉडर्ना के प्रेसिडेंट ने कहा कि कंपनियां पहले से ही रेगुलेटर्स के साथ इस इलाज पर बातचीत कर रही हैं। चूंकि इस थेरेपी को ब्रेकथ्रू थेरेपी का दर्जा मिला है इसलिए कंपनियों का मानना है कि रेगुलेटरी मंज़ूरी मिलने पर यह अगले साल तक उपलब्ध हो सकती है।

मॉडर्ना और मर्क के ट्रायल की सफलता का असर मेलेनोमा से कहीं आगे तक हो सकता है। अगर यह तरीका सुरक्षित और असरदार साबित होता रहा तो पर्सनलाइज़्ड एमआरएनए कैंसर वैक्सीन प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी का एक अहम हिस्सा बन सकती हैं। रिसर्चर अब यह पता लगा रहे हैं कि क्या कई तरह के सॉलिड ट्यूमर के लिए ऐसी ही वैक्सीन बनाई जा सकती हैं। इसका बड़ा मकसद कैंसर के इलाज को ऐसी थेरेपी की ओर ले जाना है जो हर मरीज़ के ट्यूमर की खास जेनेटिक विशेषताओं के हिसाब से तैयार की गई हों।


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