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जेएसएससी-सीजीएल चयनित अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले के विरोध में गुरुवार देर शाम को हजारों चयनित और नवनियुक्त कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। ‘जेएसएससी सीजीएल रद्द वापस लो’ अभियान के तहत प्रदर्शनकारियों ने मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से अल्बर्ट एक्का चौक तक आक्रोश मार्च निकाला। हाथों में तिरंगा और मांगों से जुड़ी तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने सरकार से परीक्षा रद्द करने का फैसला तत्काल वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का यह मार्च शाम करीब 6रू15 बजे बापू वाटिका से शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी करमटोली चौक और जेल मोड़ होते हुए करीब 7रू15 बजे अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचे। यहां लगभग एक घंटे तक प्रदर्शन और नारेबाजी की गई। शाम 7रू30 बजे प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रगान गाया। इसके बाद रात करीब 8 बजे वे वापस बापू वाटिका पहुंचे और वहां से प्रोजेक्ट भवन की ओर रवाना हो गए।

गले में फंदा डालकर जताया विरोध

जेएसएससी-सीजीएल से चयनित और सेवा से हटाए गए अधिकारियों का प्रोजेक्ट भवन के सामने धरना गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शन के दौरान कुछ अधिकारियों ने गले में रस्सी का फंदा डालकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। उन्होंने ‘न्याय दो या फांसी दो’ जैसे नारे लगाए। दोपहर करीब 2 बजे सेवा से हटाए गए अधिकारियों ने प्रोजेक्ट भवन के अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए। अधिकारियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति मिलने के बावजूद उन्हें सेवा से हटाना उनके साथ अन्याय है।

24 जिला मुख्यालयों पर पुतला दहन का ऐलान

इस बीच जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी है। मंच के प्रवक्ता रवींद्र पासवान ने गुरुवार रात प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि शुक्रवार को राज्य के 24 जिला मुख्यालयों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने सरकार पर भरोसा करते हुए अपना आंदोलन स्थगित किया था, लेकिन यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे दो महीने तक इंतजार नहीं करेंगे। मंच ने मांगें पूरी नहीं होने पर राज्यव्यापी ‘उलगुलान’, जेल भरो आंदोलन और आर-पार की लड़ाई शुरू करने की चेतावनी दी है।


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