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अंतःशुद्धि का महापर्व है नवरात्रि

(नवरात्रि पर विशेष)

नवरात्रि पर्व आदि शक्ति मां दुर्गा की पूजा का पावन पर्व है। वैसे तो नवरात्र सालभर में कुल 4 बार आते हैं लेकिन उनमें से शारदीय एवं चौत्र नवरात्र का महत्व सर्वाधिक माना गया है। वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से भी चौत्र तथा आश्विन नवरात्र का ही सर्वाधिक महत्व माना गया है। ऋतु विज्ञान के अनुसार ये दोनों ही महीने सर्दी अथवा गर्मी की संधि के महत्वपूर्ण मास हैं, जिनका हमारे स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र की शुरूआत 11 अक्तूबर से हुई है, जो 20 अक्तूबर को खत्म होंगे और 20 अक्तूबर को दशहरा पर्व मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होती है, जिसमें देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के ये नौ दिन पूर्ण रूप से मां दुर्गा और उनके आठ अलौकिक अवतारों के पूजन को समर्पित हैं और नवरात्रि का हर दिन इन्हीं में से एक अवतार से जुड़ा है।

मां दुर्गा के इन नौ अलौकिक अवतारों के माध्यम से सही मायनों में स्त्रीत्व के उत्कर्ष का स्वरूप पूर्णतः परिलक्षित होता है। मां दुर्गा के ये नौ रूप हैं शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। मान्यता है कि नवरात्र के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है और मां दुर्गा अपने भक्तों के सभी कष्ट हर लेती हैं। नवरात्रि के संबंध में एक कथानुसार देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर के साथ नौ दिन तक युद्ध किया था और नवमी की रात्रि को ही देवी ने उसका वध किया था, तभी से देवी दुर्गा को ‘महिषासुरमर्दिनी’ के नाम से भी जाना जाता है। विभिन्न पुराणों व शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने भी लंका विजय से पहले मां दुर्गा की आराधना कर उनसे आशीर्वाद और युद्ध के लिए अनुमति ली थी और मां शक्ति के आशीर्वाद के कारण ही वे युद्ध जीते थे।

शिवपुराण के अनुसार देवी दुर्गा की उत्पत्ति दुर्गम नामक एक महाबली दैत्य को मारने के लिए हुई थी, जिसने ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त करने के बाद चारों वेदों को लुप्त कर दिया था। वेदों के अदृश्य हो जाने से समस्त वैदिक क्रियाएं बंद हो गई थी। उस समय ब्राह्मण और देवता भी दुराचारी हो गए थे, न कहीं कोई दान होता था, न तप किया जाता था, न यज्ञ होता था, न हवन किया जाता था, जिसका परिणाम यह हुआ कि पृथ्वी पर सौ वर्षों तक सभी धार्मिक क्रियाएं वर्ष बंद हो गई और तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। कुएं, बावड़ी सरोवर, सरिता, समुद्र सभी सूख गए। लोग भूख-प्यास से संतप्त होकर मरने लगे। आखिरकार इन संकटों के निवारण के लिए सभी देवता महेश्वरी योगमाया की शरण में गए और योगमाया देवी दुर्गा ने दुर्गम राक्षस का वध किया। मां दुर्गा को अनंतकोटि ब्रह्मांडों की अधीश्वरी देवी माना गया है, जो सम्पूर्ण विश्व को सत्ता और स्फूर्ति प्रदान करती हैं, जिनकी शक्ति से ही ब्रह्मादि देवता उत्पन्न होते हैं, जिनसे विश्व की उत्पत्ति होती है। इन्हीं की शक्ति से शिव और विष्णु प्रकट होकर विश्व का पालन और संहार करते हैं।

वास्तव में शक्ति के रूप में मां दुर्गा की पूजा का यह पर्व न केवल महिला सशक्तिकरण का प्रमाण है बल्कि स्त्री के स्वयं में शक्ति होने का उल्लास भी है और सही मायनों में यह पर्व स्त्रीत्व का आनंदोत्सव ही है। सनातन भारतीय संस्कृति में स्त्री न केवल प्रकृति का अभिन्न अंग है बल्कि शक्ति का एकमात्र स्रोत भी है और नवरात्रि पर्व इसी नारी शक्ति-स्रोत का पूजन है। भारतीय समाज के अलावा अन्य किसी भी समाज में स्त्री के अस्तित्व और उसके सामर्थ्य के प्रति कृतज्ञता प्रदर्शित करता ऐसा पर्व देखने को नहीं मिलता। वास्तव में इस पर्व की मूल परिकल्पना ही यही है कि जो कुछ भी अच्छा है, वह स्त्री से ही सृजित या निर्मित होता है। मां दुर्गा इसी स्त्री शक्ति को प्रतिबिम्बित करती हैं, वह शक्ति, जिससे सृष्टि का श्रीगणेश हुआ, जो सृष्टि के पालन और अंत के लिए उत्तरदायी है, जो संतुलन स्थापित कर अस्तित्व को न केवल आधार प्रदान करती है बल्कि अपने अलग-अलग अवतारों से मानव जाति के जीवन का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

शक्ति के इन्हीं नौ रूपों में मां दुर्गा के पहले अवतार ‘शैलपुत्री’ को त्रिदेव शक्ति और सृष्टि की सृजनकर्ता माना गया है। दुर्गा का दूसरा स्वरूप ‘ब्रह्मचारिणी’ आध्यात्मिकता, ध्यान, शांति, समृद्धि और खुशी की प्रतीक माना गया है। तीसरा स्वरूप ‘चंद्रघंटा’ अधर्म-नाशक और धर्म-शासिका का प्रतिबिंब हैं। चौथा स्वरूप ‘कुष्मांडा’ सृष्टि का आरंभ और तमसहर्ता है। पांचवां स्वरूप ‘स्कंदमाता’ ज्ञान, शक्ति, अग्नि, ऊर्जा, जीवन और समृद्धि का पर्याय है। छठा स्वरूप ‘कात्यायनी’ महायोद्धा से रूप में महिषासुरमर्दिनी हैं। सातवां स्वरूप ‘कालरात्रि’ बुराई का नाश करने वाली देवी दुर्गा का हिंसक रूप है। आठवां स्वरूप ‘महागौरी’ पवित्रता, ऊर्जा और प्रतिभा का प्रतिनिधित्व करती है जबकि नौवां स्वरूप ‘सिद्धिदात्री’ सर्वव्यापक है, ज्ञान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि का यह महापर्व लोगों को आध्यात्मिक रूप से जागृत करने और उन्हें देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।

वास्तव में नवरात्रि पर्व अंतःशुद्धि का महापर्व है, जिसका मूल उद्देश्य इंद्रियों का संयम और आध्यात्मिक शक्ति का संचय ही है। नवरात्रि के ये नौ दिन शक्ति की साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। ‘नवरात्रि में ‘नव’ का शाब्दिक अर्थ है नौ और नया जबकि ‘रात्रि’ शब्द अपने आप में सिद्ध का प्रतीक है। विभिन्न धर्मग्रंथों में नवरात्रि की नौ रातों को बहुत विशेष माना गया है। पुराणों के अनुसार नवरात्रि की इन नौ रातों में व्यक्ति व्रत, पूजा, मंत्र जाप, संयम, नियम, यज्ञ, तंत्र, त्राटक, योग इत्यादि करके नौ अलौकिक सिद्धियां प्राप्त कर सकता है। दुर्गा की पूजा करने से जीवन में शक्ति का संचार होता है और उसके बाद जब आप शक्ति और ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ते हैं तथा किसी भी कार्य को करते हैं तो सफलता निश्चित तौर पर मिलती है।

शारदीय नवरात्रि से ऋतु में परिवर्तन होने लगता है और प्रकृति सर्दी की चादर में सिकुड़ने लगती है, ऐसे में नवरात्रि की नौ दिनों की अवधि में उपासक संतुलित और सात्विक भोजन ग्रहण कर अपना ध्यान चिंतन और मनन में लगाकर स्वयं को भीतर से शक्तिशाली बना सकते हैं, जिससे ऋतु परिवर्तन का उनकी सेहत पर बुरा असर नहीं पड़ता। नवरात्रि के नौ व्रत रखने से न केवल स्वयं को मानसिक रूप से भीतर से शक्तिशाली बनाया जा सकता है बल्कि उत्तम स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसके कई लाभ होते हैं। मान्यता है कि जो भक्त नवरात्रि का व्रत रखते हैं, वे दूसरों की तुलना में आरोग्य जीवन जीते हैं। दरअसल नवरात्रि व्रत के दौरान लोग गरिष्ठ भोजन से दूर रहते हैं और फल ग्रहण करते हैं, जिससे बॉडी डिटॉक्स होती है, तनाव की समस्या दूर होती है और त्वचा में निखार भी बढ़ता है। नवरात्रि व्रत रखने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम हो जाता है। नौ दिनों तक पूरे संयम के साथ व्रत रखने से आध्यात्मिक फायदों के अलावा पेट को आराम मिलने से उसकी सेहत अच्छी होती है, रक्तचाप नियंत्रित होता है, गठिया, अस्थमा, एलर्जी, हृदय रोगों में आराम मिलता है, नींद बेहतर होती है, उम्र लंबी होती है तथा कैंसर, अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी कम होता है।


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