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क्या महिला पुलिस पर कोई कानूनी प्रतिबंध है

नई दिल्ली । क्या महिला पुलिस कर्मी किसी पुरुष को हिरासत में ले सकती है अथवा नहीं। हाल ही में सीजेपी के नेता अभिजीत दिपके और उनके साथियों को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के बाद यह सवाल चर्चा में आया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभिजीत दिपके अपने साथियों सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। विमान के दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद पुलिसकर्मी विमान के भीतर पहुंचे और उन्हें हिरासत में ले लिया।

इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर बहस भी हुई। भारतीय कानून में ऐसा कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है, जिसके तहत महिला पुलिसकर्मी किसी पुरुष को गिरफ्तार नहीं कर सकती। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 43 गिरफ्तारी की प्रक्रिया से संबंधित है। इसके तहत वैध आधार होने पर पुलिस अधिकारी कानून के अनुसार किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है। केवल आरोपी के पुरुष होने के कारण महिला पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी से रोकने वाला कोई सामान्य नियम नहीं है। 

हालांकि, गिरफ्तारी, शारीरिक रूप से पकड़ने और तलाशी की प्रक्रिया अलग-अलग कानूनी विषय हैं। किसी व्यक्ति को हिरासत में लेते समय पुलिस को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है। यदि संबंधित व्यक्ति गिरफ्तारी का विरोध करता है या भागने की कोशिश करता है, तो कानून की सीमाओं के भीतर आवश्यक बल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पुलिस किसी भी परिस्थिति में मनमाना बल प्रयोग कर सकती है। तलाशी के नियमों में अलग प्रावधान हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 49 के तहत किसी महिला की तलाशी दूसरी महिला द्वारा शालीनता का पूरा ध्यान रखते हुए की जानी चाहिए। यह प्रावधान महिला की तलाशी से जुड़ा है और इसका अर्थ यह नहीं है कि पुरुष को गिरफ्तार करने के लिए हर परिस्थिति में पुरुष पुलिसकर्मी की मौजूदगी अनिवार्य है। गिरफ्तारी के दौरान संबंधित व्यक्ति के अधिकारों का पालन करना भी जरूरी है। उसे कानून के अनुसार गिरफ्तारी के आधार की जानकारी दी जानी चाहिए। गिरफ्तारी का रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसके किसी रिश्तेदार, मित्र या नामित व्यक्ति को इसकी सूचना देने की व्यवस्था होनी चाहिए। 

लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी पसंद के वकील से मिलने का अधिकार भी प्राप्त है, हालांकि वकील का पूरी पूछताछ के दौरान उपस्थित रहना अनिवार्य नहीं है। अभिजीत दिपके और उनके साथियों को हिरासत में लिए जाने की घटना का संबंध 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से बताया गया। कॉकरोच जनता पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता पंजीकरण से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। विमान के भीतर हिरासत की कार्रवाई के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर उठे सवालों के बीच कानूनी स्थिति यही है कि पुरुष की गिरफ्तारी केवल इस आधार पर अवैध नहीं हो जाती कि कार्रवाई महिला पुलिसकर्मी ने की है। 

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