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भारत को प्रवासियों द्वारा भेजा गया धन 138 बिलियन पहुंचने का अनुमान

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया हो या फिर रूस यूक्रेन में भयंकर तबाही मची है, लेकिन अब इन महासंकटों के बीच भारत ने एक ऐसा आर्थिक ब्रह्मास्त्र चला है जिससे पूरी दुनिया हैरान है। दरअसल आज भारत केवल एक मुखदर्शक नहीं है बल्कि विश्व मित्र की भूमिका में है। जहां एक तरफ पीएम मोदी शांति का संदेश देते हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत के प्रवासी भारतीय अपनी मेहनत से देश की नींव मजबूत कर रहे हैं। एक रिपोर्ट भारत की इसी बढ़ती साख की गवाही दे रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक विदेश से पैसा घर भेजने के मामले में भारतीय प्रवासियों ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। भारत को मिलने वाली रेमिटेंस यानी प्रवासियों द्वारा भेजा गया धन 138 बिलियन पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले साल से 15फीसदी ज्यादा है। यह विशाल धनराशि हमारे व्यापार घाटे का 40 से 45फीसदी हिस्सा अकेले संभाल लेती है।  भारत जो बाहर से खरीदता है उसका आधा भुगतान हमारे विदेशों में बैठे वीर सिपाही या फिर आप इन्हें श्रमिक कह सकते हैं वो कर देते हैं। वैसे अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। जीसीसी देशों यानी यूएई, सऊदी अरब, क़तर में काम कर रहे लाखों भारतीयों के रोजगार पर खतरा मंडराता दिख रहा है। पर्यटन, लॉजिस्टिक और निर्माण जैसे क्षेत्रों में सुस्ती दिखाई दे रही है और एक समय था जब भारत पूरी तरह खाड़ी देशों पर निर्भर था। यूएसए और विकसित देशों से अब कुल रेमिटेंस का 42फीसदी हिस्सा आ रहा है और भारतीय अब सिर्फ मजदूरी नहीं बल्कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों और अर्थव्यवस्थाओं को चला रहे हैं, लेकिन केरल जैसे राज्यों के लिए यह खबर चिंताजनक है जहां की 20फीसदी रेमिटेंस सीधे खाड़ी देशों से आती है। अगर युद्ध लंबा चलता है तो हमें एक होम कमिंग पॉलिसी की जरूरत होगी ताकि लौटने वाले हुनरमन भारतीयों को देश के निर्माण में लगाया जा सके। 

रिपोर्ट के मुताबिक रेमिटेंस पर आरबीआई के पुराने सर्वे के मुताबिक कुल रकम में से ज्यादातर इस्तेमाल पारिवारिक जरूरतों के लिए किया जाता है। कुछ रकम को डिपॉजिट और निवेश के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है और इस तिमाही में रेमिटेंस बढ़ने की एक वजह यह भी है कि त्योहारों और शादियों की वजह से इस दौरान प्रवासी भारतीय काफी रकम अपने घर भेज रहे हैं। भारत की असली ताकत उसकी सेना के साथ-साथ उसकी आर्थिक रीड भी है।

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