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सर्जरी की जगह जनरल मेडिसिन की ओर बढ़ा रुझान

मेडिकल क्षेत्र में पिछले कुछ साल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मेडिकल ग्रेजुएट्स अब सर्जरी की जगह पर एमडी जनरल मेडिसिन कारना चाहते है। मास्टर इन सर्जरी के (एमएस) में प्रवेश में जबरदस्त गिरावट देखी गई है। टॉप 100 में से सिर्फ तीन उम्मीदवारों ने ही एमएस को चुना है जबकि 2021 में कम से कम 11 उम्मीदवारों ने एमएस कोर्स चुना।

एआई का डर

इसी तरह रेडियोलॉजी और डर्मेटोलॉजी में एमडी, जो कभी टॉप रैंकर्स के बीच सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले कोर्स थे, उनमें दिलचस्पी में भारी गिरावट देखी गई है। कैंडिडेट्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आने को लेकर परेशान हैं, जिसके रेडियोलॉजी में डॉक्टरों की जगह लेने का डर है। डर्मेटोलॉजी में आर्टिफिशियल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट में हालिया बढ़ोतरी ने मेडिकल ग्रेजुएट्स की दिलचस्पी बदल दी है। जनरल सर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी और न्यूरोसर्जरी जैसी सर्जिकल ब्रांच में दिलचस्पी बहुत ज्यादा सीखने पढ़ने, काम के बोझ, मेडिको-लीगल रिस्क, इमरजेंसी अधिक होना और वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी की वजह से कम हुई है।

मेडिसिन सबसे बड़ी वरीयता 

पिछले पांच सालों में टॉप रैंक वाले उम्मीदवारों के बीच सीट प्रेफरेंस पैटर्न में काफी बदलाव आया है। लगभग 44-47 फीसदी ग्रेजुएट्स मेडिसिन और 40-43 फीसदी रेडियोलॉजी चुन रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक सर्जरी में काम के लंबे घंटे होते हैं। डॉक्टर अपने क्लिनिक खोल सकते हैं, इंडिपेंडेंट प्रैक्टिस बहुत कम होती है क्योंकि ज्यादातर सर्जिकल काम के लिए हॉस्पिटल से अटैचमेंट की जरूरत होती है। सर्जरी सेक्टर सीमित है क्योंकि सीनियर स्पेशलिस्ट के रिटायर होने तक नए लोगों के लिए कम जगह बची है। जब तक वे रिटायर नहीं होते, नए डॉक्टरों के लिए मौके कम होते हैं।और पूरे कोर्स के दौरान हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस पर निर्भर करती है।


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