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थलापति अपनी सियासी चाल से ही बनाएंगे अपना सारथी

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में दशकों पुरानी दो-दलीय व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। सुपरस्टार थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने अपने पहले ही चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सबको चौंका दिया है। बहुमत की कमी के बावजूद थलापति विजय की स्थिति बेहद मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीवीके के पास सरकार बनाने के लिए दो प्रमुख विकल्प मौजूद हैं। पार्टी एक तरफ कांग्रेस और दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके के साथ संपर्क में है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने विजय को समर्थन देने के सकारात्मक संकेत दिए हैं। मंगलवार को विजय ने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक की, जिसके बाद गठबंधन की संभावनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। टीवीके 108 सीटें जीतकर विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने सत्ताधारी डीएमके (59 सीटें) को काफी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से विजय की पार्टी महज 10 सीटें दूर रह गई है, जिससे राज्य में गठबंधन सरकार का रास्ता साफ हो गया है।

अंदरूनी सूत्रों की मानें तो एक प्रस्तावित फॉर्मूले के तहत यदि टीवीके और कांग्रेस साथ आते हैं, तो कांग्रेस को नई सरकार में दो कैबिनेट पद मिल सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस की 5 सीटों के साथ भी बहुमत का आंकड़ा कम पड़ता दिख रहा है, जिसके लिए अन्य छोटे दलों का समर्थन अनिवार्य होगा। इसी बीच एआईएडीएमके के साथ भी बातचीत की खबरें तेज हैं। एआईएडीएमके के पास 47 सीटें हैं, जो टीवीके के साथ मिलकर एक स्थिर सरकार देने में सक्षम है। चर्चा है कि गठबंधन सहयोगियों को सरकार में 4 से 6 मंत्री पद दिए जा सकते हैं, ताकि विजय के पास अनुभव की कमी को दूर किया जा सके। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने पुष्टि की है कि थलापति विजय ने समर्थन का अनुरोध किया है और राज्य इकाई को इस पर अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया गया है। दूसरी ओर, यह भी खबर है कि विजय और एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के बीच शुरुआती दौर की बातचीत शुरू हो चुकी है। फिलहाल सीपीआई, सीपीएम और वीसीके जैसे दलों ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। तमिलनाडु के सियासी इतिहास में यह एक बड़ा मोड़ है, जहां दशकों बाद कोई तीसरी ताकत न केवल उभरी है बल्कि सरकार बनाने की दहलीज पर खड़ी है। अब देखना यह है कि थलापति विजय अपनी सियासी चाल से किसे अपना सारथी बनाते हैं।

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