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भारत को राहत

नई दिल्ली । ईरान ने संकेत दिया है कि भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, तेहरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि मित्र देशों के लिए विशेष रियायत पर विचार किया जाएगा। इस बयान के बाद दुनिया के कई देशों की नजर इस फैसले पर टिक गई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग माना जाता है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर सेवा शुल्क लागू भी करता है, तो भारत को मित्र देश का दर्जा मिलने के कारण विशेष छूट या रियायत मिल सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति ईरान की आधिकारिक नीति और आगामी दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

चीन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान ईरान के एक वरिष्ठ राजनयिक ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का एक हिस्सा ईरान के क्षेत्रीय जल में आता है। ऐसे में वहां से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लेना स्वाभाविक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे पारंपरिक टोल टैक्स के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि समुद्री सेवाओं से जुड़े शुल्क के तौर पर समझा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन देशों ने कठिन समय में ईरान का साथ दिया है, उनके लिए विशेष व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, ईरान ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह शुल्क कब से लागू होगा, इसकी दर क्या होगी और किन देशों या जहाजों पर यह लागू किया जाएगा। साथ ही यह भी नहीं बताया गया है कि किन मित्र देशों को इससे छूट मिलेगी। भारत के संदर्भ में यह घोषणा राहत देने वाली मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। अतीत में भी तनावपूर्ण परिस्थितियों के दौरान ईरान ने भारतीय जहाजों के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया था।

जब क्षेत्रीय सुरक्षा कारणों से समुद्री आवाजाही प्रभावित हुई थी, तब भी भारतीय जहाजों को विशेष अनुमति दिए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। इससे पहले ईरान के भारत स्थित राजदूत भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि भारतीय जहाजों से किसी प्रकार का टोल नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने भारत और ईरान के रिश्तों को भरोसेमंद और पारस्परिक हितों पर आधारित बताते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है।

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