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एक साथ पांच राज्यो के मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा

समाजवादी पार्टी  के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा हाल ही में यह दावा किया गया है कि भारतीय जनता पार्टी  उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश व बिहार में मुख्यमंत्री बदलने की तैयारी कर रही है। अखिलेश यादव का आरोप है कि केंद्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाने के लिए एक बहाना ढूंढ रहा है, ताकि अंततः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पद से हटाया जा सके।वही बिहार में भरत तिवारी फर्जी एनकाउंटर ने मुख्यमंत्री की कुर्सी को हिलाकर रख दिया है। साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव करते हुए करीब 10 मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। इतना ही नही देश के पांच राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की भी संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि दो केंद्रीय मंत्रियों को राज्यपाल बनाया जा सकता है।

इन अटकलों को उस समय और बल मिला जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। हालांकि, इस मुलाकात के उद्देश्य को लेकर राष्ट्रपति भवन या गृह मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।फिर भी मध्य प्रदेश, राजस्थान ,उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन पार्टी या सरकार की ओर से ऐसी किसी संभावना की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है। महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। दावा किया जा रहा है कि शिवसेना के कुछ विधायक पाला बदल सकते हैं, जबकि भाजपा संगठन में भी नई नियुक्तियों और जिम्मेदारियों को लेकर मंथन चल रहा है। फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक चर्चाओं और सूत्रों पर आधारित है। केंद्र सरकार और भाजपा की ओर से किसी भी बड़े फेरबदल को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सभी की नजरें आने वाले दिनों में पार्टी और सरकार के संभावित फैसलों पर टिकी हैं।लेकिन इन चर्चाओं को बल क्यो मिला , इसके भी अलग अलग कारण सामने आ रहे है।

उत्तर प्रदेश में राम मंदिर में दान-चढ़ावे की चोरी के आरोपों को लेकर राजनीति गरमा गई है।  इस मुद्दे का इस्तेमाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि खराब करने और उन्हें घेरने की कोशिश के रूप में हो रहा है।योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक विरोधी इस अवसर को भुनाने की फिराक में है और इस मुद्दे पर योगी को मुख्यमंत्री की कुर्सी से बेदखल करने की तैयारी कर रहे है।तभी तो  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोधियों ने इस विषय को राजनीतिक रंग देना शुरू कर दिया है।योगी विरोधियों को लगता है कि योगी को कुर्सी से हटाने के इससे बेहतर अवसर कोई दूसरा नही हो सकता। लेकिन वास्तव में श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी मुख्यमंत्री की कुर्सी को हिला पाती है या नही यह आने वाले दिनों में ही पता चल पाएगा। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव को उनके पद से हटाने का मुद्दा हाल ही में उनके और उनके परिवार द्वारा उज्जैन में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने से जुड़े जमीन सौदे  के आरोपों के कारण गरमाया है।मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से मोहन यादव के परिवार और रियल एस्टेट फर्मों ने उज्जैन में भारी मात्रा में जमीन खरीदी है।

जिस पर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि उनके मंत्री और फिर मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार की जमीन का स्वामित्व लगभग 100 एकड़ से बढ़कर 335 एकड़ कैसे हो गया?यह जांच का विषय है।आरोप ये भी है कि ये जमीनें ज्यादातर उन क्षेत्रों में खरीदी गईं, जहां सरकार ने जमीन खरीदने के बाद नई सड़क परियोजनाओं और भूमि-उपयोग  में बदलाव की घोषणा की थी।मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इसे महाकाल की जमीन की लूट करार दिया है। कांग्रेस ने नैतिक आधार पर सीएम के इस्तीफे और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से न्यायिक जांच की मांग की है।जबकि भाजपा का कहना है कि मोहन यादव का परिवार सालों से रियल एस्टेट के कारोबार में है और  परिवार के निजी व्यापार को सीएम पद से जोड़ना गलत है।वही राजस्थान में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने हाल ही में दावा किया  कि राजस्थान और दिल्ली दोनों स्तरों पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पद से हटाने के लिए एक बड़ी साजिश चल रही है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ऐसे दावे किए है कि भाजपा कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदलने की तैयारी में है।कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि स्थानीय भाजपा विधायकों और नेताओं को दरकिनार किए जाने, और प्रशासन में नौकरशाहों का हस्तक्षेप अधिक होने से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रति असंतोष पनप रहा है।गहलोत ने दावा किया है कि शर्मा को मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर ही एक भयंकर षड्यंत्र रचा जा रहा है. कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, अभी तो इनके खिलाफ में इनके पार्टी के लोग लग चुके हैं, दिल्ली में भी और राजस्थान के अंदर भी ,भयंकर षड्यंत्र चल रहा है इनको हटाने का, ये समझ नहीं पा रहे हैं. गहलोत ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद शर्मा के हित में यह सलाह दी है कि उन्हें बनाए रखना चाहिए, क्योंकि एक युवा नेता को पहली बार मौका मिला है और वह सीधे मुख्यमंत्री बन गए हैं, यह बहुत बड़ी बात है। अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के चारों ओर के माहौल पर भी सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि शर्मा के इर्द-गिर्द तारीफ करने वालों का घेरा बना हुआ है, जिससे उन्हें असली हालात की जानकारी नहीं मिल पा रही है। पूर्व सीएम गहलोत ने कहा, अब जो इनके चारों ओर जो घेरा बना लिया है इन्होंने, वो इनकी तारीफों के पुल बांध रहा होगा कि अच्छी सरकार चल रही है, तो इनको समझ में आ नहीं रही है। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री कार्यकर्ताओं से सीधे बात करें, तो जमीनी सच्चाई सामने आ सकती है।

दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में हाल ही में संभावित फेरबदल की चर्चाएं उठीं है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा और रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री निवास  मे  बैठकें बुलाई थीं। हालाँकि, इसे शासन-प्रशासन के स्तर पर कामकाज में सुधार और योजनाओं की गति तेज करने की प्रक्रिया माना गया है।फिर भी दिल्ली से उन्हें हटाने की चर्चाओं को हवा मिल रही है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के भीतर आंतरिक असंतोष और प्रशासनिक गतिरोध की ख़बरें सामने आई हैं, जिसके कारण नेतृत्व में फेरबदल की अटकलें भी तेज हो गई हैं।छत्तीसगढ़ के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार के भीतर गहरे मतभेद, नौकरशाही पर नियंत्रण में कमी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पनप रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि सत्ताधारी नेताओं की कार्यप्रणाली और अधूरे वादों को लेकर विभिन्न वर्गों में समय-समय पर नाराजगी देखी गई है।जिस कारण नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे को बल मिल रहा है।

बिहार में भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर पर भारी विवाद के कारण बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राजनीतिक दबाव में आ गए है और उनकी कुर्सी पर भी खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, उनके सीधे इस्तीफे या पद से हटाए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन सरकार ने बैकफुट पर आते हुए न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया है।बढ़ते आक्रोश को देखते हुए बिहार सरकार ने घटना की जांच पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाली न्यायिक समिति को सौंप दी है, साथ ही जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर भी प्रशासनिक गाज गिरी है।जनसुराज पार्टी के अध्यक्ष प्रशांत किशोर ने दावा किया कि यह पुलिस एनकाउंटर नहीं बल्कि हत्या का मामला है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वो प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से अनुभवहीन हैं और अपराध के खिलाफ उनकी नीति केवल दिखावटी है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री के अतीत और उनकी कार्यशैली को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है।सम्राट चौधरी की सरकार के लिए ये पहली अग्निपरीक्षा है, इसमें एक भी गलती सरकार का बड़ा नुकसान कर सकती है।

चौधरी सरकार की मुश्किल इसलिए भी बढ़ी क्योंकि बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से माना कि कार्रवाई के दौरान कुछ चूक हुई है। इसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई। हालांकि, इससे सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह किसी को बचाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि पूरी सच्चाई अभी सामने नहीं आई है।विपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री को हटाने की मांग को लेकर जो दबाव बन रहा है वह सम्राट चौधरी की कुर्सी की बलि ले सकता है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की है। एक तरफ उन्हें यह दिखाना है कि सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है और किसी भी तरह की गलती को छिपाने की कोशिश नहीं करेगी। दूसरी तरफ उन्हें पुलिस बल का मनोबल भी बनाए रखना है। अगर पुलिस को यह संदेश जाए कि किसी भी विवाद की स्थिति में सरकार उसके साथ नहीं खड़ी होगी, तो इसका असर कानून-व्यवस्था पर पड़ सकता है।बहरहाल हम कह सकते है कि परिणाम चाहे जो हो,लेकिन ऐसा पहले कभी नही हुआ जो एक साथ पांच मुख्यमन्त्रियो की कुर्सियां एक साथ हिलने लगी हो।

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